खेती-किसानी

गेहूं की उन्नत किस्म डीबीडब्ल्यू 443 से किसानों को मिलेगी बम्पर उपज

Improved wheat variety DBW 443

नई दिल्ली: गेहूं की खेती करने वाले देश के किसानों के लिए डीबीडब्ल्यू 443 एक ऐसी आधुनिक किस्म के रूप में उभरी है, जिसे बेहतर पोषण और बदलते मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखकर विशेष रूप से विकसित किया गया है। कृषि जगत में करण सान्वि के नाम से लोकप्रिय यह किस्म किसानों को अधिक उत्पादन देने के साथ-साथ पोषण से भरपूर अनाज उपलब्ध कराने पर मुख्य जोर देती है। इस गेहूं में लगभग तेरह दशमलव चार प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जिसके साथ ही इसमें आयरन की मात्रा लगभग 41.9 पीपीएम और जिंक की मात्रा 43 पीपीएम मौजूद है। अर्थात इस किस्म में सामान्य पोषण के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य के लिए आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व भी प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं।

गर्मी और सूखे को सहने की क्षमता तथा उत्पादन में स्थिरता

जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती गर्मी और पानी की कमी किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है, ऐसे समय में इस किस्म की गर्मी सहने और सूखे की स्थिति में टिके रहने की अद्भुत क्षमता किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो रही है। इस किस्म को प्रतिकूल और चुनौतीपूर्ण मौसमी परिस्थितियों में भी पैदावार को स्थिर रखने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद से जुड़ी गेहूं अनुसंधान प्रणाली द्वारा विकसित यह किस्म मौसम के अनिश्चित बदलावों के बावजूद फसल के विकास को बनाए रखती है, जो किसानों की आय में स्थिरता लाने और कृषि को टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मजबूत किसान और पोषित परिवार का लक्ष्य हासिल करने में भूमिका

डीबीडब्ल्यू 443 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसका लाभ केवल खेत और उपज तक ही सीमित नहीं रहता, बल्कि इसमें मौजूद प्रोटीन, आयरन और जिंक किसान परिवार के भोजन में पोषण स्तर को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह किस्म एक ओर जहां किसानों को बदलते मौसम के आर्थिक जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करती है, वहीं दूसरी ओर परिवारों के लिए पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करती है। कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि उच्च जैव-संवर्धित पोषक तत्वों से भरपूर और सूखा रोधी क्षमता वाली यह किस्म आने वाले समय में देश के किसानों को सशक्त बनाने और कुपोषण से निपटने में मुख्य भूमिका निभाएगी।

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