भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए विस्तृत फसल सलाह जारी की है। विभाग ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में ठंड की लहर चल सकती है, इसलिए किसानों को अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त एहतियात बरतने की जरूरत है। IMD के अनुसार रात के तापमान में गिरावट से फसलों को नुकसान हो सकता है, इसलिए शाम को हल्की और बार-बार सिंचाई या स्प्रिंकलर सिस्टम का उपयोग करना उपयोगी रहेगा। छोटे फलों के पौधों को बचाने के लिए उन्हें पुआल, पॉलीथीन शीट या बोरी से ढकने की सलाह दी गई है।
गेहूं और चने की बुवाई पर IMD का जोर
सतपुड़ा पठारी जोन में IMD ने किसानों को तुरंत रबी फसलों की बुवाई शुरू करने को कहा है। खेतों की तैयारी कर सिंचाई करने और बुवाई के बाद पाटा लगाकर मिट्टी में नमी बनाए रखने की सलाह दी गई है। गेहूं की बुवाई से पहले बीजों का उपचार कार्बोक्सिल (विटावैक्स 75 WP) या थिरम से करने को कहा गया है। वहीं, निमाड़ वैली जोन में चने की बेहतर किस्मों का चयन कर बीजों को कार्बोक्सिल+थिरम और ट्राइकोडर्मा से ट्रीट करने की सलाह दी गई है। इस क्षेत्र में आरंभिक खाद के रूप में NPKS का संतुलित उपयोग करने पर भी जोर दिया गया है।
कपास की फसल के लिए कीट प्रबंधन और खाद का निर्देश
झाबुआ हिल्स जोन के लिए IMD ने कपास पर विशेष सलाह जारी की है। 125 से 135 दिन पुरानी कपास में नाइट्रोजन खाद की बताई गई मात्रा के दसवें हिस्से को डालने का निर्देश दिया गया है। Bt कॉटन में रस चूसने वाले कीटों को नियंत्रित करने के लिए थियामेथोक्साम के स्प्रे की सलाह दी गई है, जबकि फूल गिरने को रोकने के लिए प्लेनोफिक्स के उपयोग की अनुशंसा की गई है। सब्जियों में वायरल रोगों को फैलने से रोकने के लिए भी इसी कीटनाशक का उपयोग करने का सुझाव दिया गया है।
गिर्द और नर्मदा वैली में सरसों व चने पर फोकस
गिर्द जोन में सरसों की फसल में धब्बेदार कीट के बढ़ने की संभावना जताई गई है, जिसके लिए डाइमेथोएट के स्प्रे का सुझाव दिया गया है। इसके साथ ही चने की बुवाई शुरू करने और बीजों को कार्बेन्डाजिम व थिरम से उपचारित करने की सलाह दी गई है। गेहूं, आलू, मसूर और चने की बुवाई भी इस समय की जानी चाहिए।
सेंट्रल नर्मदा वैली जोन में गेहूं, चना और सरसों की बुवाई शुरू करने और बीजों को कार्बेन्डाजिम से ट्रीट करने की सलाह दी गई है। गन्ने की फसल में अर्ली शूट बोरर दिखने पर कार्बोरिल (सैविडोल) डालने की आवश्यकता बताई गई है।
मालवा और विंध्य क्षेत्रों में खेत तैयारी तेज करने की सलाह
मालवा पठार क्षेत्र में गेहूं की बुवाई से पहले प्री-इरिगेशन के साथ क्लोरपाइरीफॉस डालने का निर्देश दिया गया है। चने के बीज के उपचार के लिए थायोफैनेट मिथाइल और पाइक्लोस्ट्रोबिन मिश्रण का प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
विंध्य और काइमोर पठार क्षेत्रों में भी रबी फसलों की बुवाई शुरू करने और खेतों की खूब तैयारी करने की बात कही गई है। खरपतवार हटाने, नालियों को साफ करने और मिट्टी में अच्छी तरह सड़ी खाद डालने पर जोर दिया गया है। सब्जियों की पत्तियों के पीले पड़ने या जड़ सड़न के लक्षण मिलने पर कार्बेन्डाजिम घोल का छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए धान कटाई व रबी बुवाई की गाइडलाइन
छत्तीसगढ़ के नॉर्थ हिल जोन में धान की पकी फसल को काटकर 2–3 दिन खेत में सुखाने और भंडारण से पहले नमी को 12% से कम रखने की सलाह दी गई है। रबी सब्जियों की नर्सरी तैयार करने और गेहूं की बुवाई के लिए अच्छी क्वालिटी के बीजों का उपयोग करने की बात कही गई है। जिन क्षेत्रों में सल्फर की कमी पाई जाती है, वहां अंतिम जुताई के समय सल्फर डालने की सलाह दी गई है।
बस्तर पठारी जोन में धान की शुरुआती किस्मों की कटाई शुरू करने और पके हुए मक्का की कटाई करने की बात कही गई है। चना और सरसों की बुवाई शुरू करने, टमाटर, मिर्च, बैंगन और फूलगोभी की रोपाई के लिए उचित उर्वरक मात्रा का प्रयोग करने और किस्मों के अनुसार उचित दूरी पर पौधों को लगाने की अनुशंसा की गई है।
IMD का संदेश: मौसम के बदलाव के बीच सतर्क रहें
IMD ने किसानों से अपील की है कि मौसम में तेजी से हो रहे बदलावों के चलते फसलों पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अपने-अपने क्षेत्रों के अनुसार जारी एडवाइजरी का पालन करें ताकि रबी सीजन में पैदावार सुरक्षित और बेहतर बनी रहे।
