खेती-किसानी

गन्ने की फसल में टॉप बोरर कीट के प्रकोप से ऐसे करें बचाव

How to protect sugarcane crop from the infestation of top borer insect

नई दिल्ली: भारत के प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में किसानों को अक्सर टॉप बोरर यानी चोटी-भेदक कीट की गंभीर चुनौती का सामना करना पड़ता है। यह वही हानिकारक कीट है जिसने पिछले वर्ष भी गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया था। कृषि विज्ञानियों और कीट विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी की है कि यदि समय रहते सचेत कदम नहीं उठाए गए तो गन्ने की कुल उपज में भारी गिरावट आ सकती है। इस कीट की सुंडियां पत्तियों की मध्य शिरा को छेदकर सीधे गन्ने के गोफ में प्रवेश कर जाती हैं और पौधे की प्राकृतिक वृद्धि को रोक देती हैं, जिससे गन्ने की गुणवत्ता और वजन दोनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

गलत छिड़काव तकनीक और अनुपयुक्त दवाओं का चयन बन रहा है किसानों के लिए बड़ी परेशानी

किसानों से बातचीत के दौरान यह तथ्य उजागर हुआ है कि वे अक्सर कीट की सही पहचान और उसके जीवन चक्र को समझे बिना ही दवाओं का छिड़काव कर देते हैं, जिससे कीटों पर कोई असर नहीं होता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कीट की तीसरी पीढ़ी सबसे अधिक नुकसान पहुंचाती है और इसका सही समय पर प्रबंधन करना अनिवार्य होता है। अक्सर किसान प्रति एकड़ केवल एक सौ पचास से दो सौ लीटर पानी में दवा मिलाकर छिड़काव करते हैं, जबकि विशेषज्ञों द्वारा तीन सौ से चार सौ लीटर पानी का उपयोग करने की सिफारिश की जाती है। पानी की कम मात्रा के कारण दवा पूरी फसल पर समान रूप से नहीं फैल पाती है और कीट नियंत्रण अधूरा रह जाता है। इसके अलावा सस्ती और स्थानीय ब्रांड की दवाओं का प्रयोग भी निष्प्रभावी साबित होता है, इसलिए विशेषज्ञों द्वारा प्रमाणित ब्रांड्स के उपयोग की सलाह दी जाती है।

उपकरण सफाई घोल की गुणवत्ता और बहु-मिश्रण से बचाव के व्यावहारिक उपाय

कीट नियंत्रण में स्प्रे पंप की स्वच्छता और सही घोल की तैयारी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सर्वे के अनुसार अधिकतर किसान छिड़काव से पहले पंप की सही सफाई नहीं करते, जिससे पुरानी दवा नई दवा के प्रभाव को नष्ट कर देती है। साथ ही कई किसान एक साथ कीटनाशक, फफूंदनाशक और वृद्धि वर्धक रसायनों को मिलाकर छिड़क देते हैं, जिससे उनके बीच अवांछित रासायनिक प्रतिक्रियाएं होती हैं और फसल को भारी नुकसान पहुंचता है। विशेषज्ञों ने अलग-अलग चरणों में छिड़काव करने और ड्रेन वाल्व वाले आधुनिक स्प्रे पंपों का इस्तेमाल करने का सुझाव दिया है। यदि किसान सही समय पर उचित दवा, निर्धारित पानी की मात्रा और स्वच्छ उपकरणों का उपयोग करते हुए आपस में सही जानकारी साझा करें, तो वे इस प्रकोप से अपनी फसल को सुरक्षित रखकर अधिक आर्थिक लाभ अर्जित कर सकते हैं।

ये भी पढ़ें: लौकी की फसल में अधिक फल-फूल पाने के लिए अपनाएँ ये असरदार उपाय

Related posts

Leave a Comment