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पंजाब में बागवानी को बढ़ावा, सह्याद्री मॉडल अपनाएगी सरकार

Horticulture in Punjab

चंडीगढ़: पंजाब में बागवानी को नई दिशा देने के लिए राज्य सरकार तैयारी में जुट गई है। किसानों की आमदनी बढ़ाने और धान-गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से अब महाराष्ट्र के सफल बागवानी मॉडल को अपनाने की योजना बनाई जा रही है।

सह्याद्री मॉडल का किया अध्ययन

इस दिशा में बागवानी मंत्री मोहिंदर भगत के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने Sahyadri Farmers Producer Company Limited का दौरा किया। नासिक स्थित इस एफपीओ के पैक हाउस, प्रोसेसिंग यूनिट, रिसर्च फार्म और ट्रेनिंग सेंटर का निरीक्षण कर प्रतिनिधिमंडल ने सामूहिक खेती और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली को समझा।

मंत्री और अधिकारियों ने किसानों व विशेषज्ञों से बातचीत कर यह जाना कि किस तरह वैज्ञानिक फसल योजना, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और प्रोसेसिंग के जरिए किसानों को बेहतर बाजार और अधिक मूल्य मिल सकता है।

पंजाब और सह्याद्री के बीच एमओयू

दौरे के दौरान पंजाब सरकार और सह्याद्री के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते का उद्देश्य पंजाब में किसान उत्पादक संगठनों को मजबूत करना और उन्हें संस्थागत सहयोग देना है। सरकार का मानना है कि मजबूत एफपीओ ढांचा किसानों को बाजार से सीधा जोड़ने में मदद करेगा।

42 देशों में निर्यात का सफल मॉडल

मंत्री ने कहा कि सह्याद्री मॉडल की सबसे बड़ी ताकत हजारों किसानों का सामूहिक नेटवर्क है। करीब 30 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में फैले इस नेटवर्क के जरिए फल और सब्जियों का उत्पादन कर उन्हें 42 देशों में निर्यात किया जा रहा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि संगठित प्रयास व्यक्तिगत खेती की तुलना में अधिक लाभकारी साबित हो सकते हैं।

पंजाब के किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण

पंजाब में बागवानी मॉडल को लागू करने के तहत किसानों को वैज्ञानिक फसल चयन, गुणवत्ता नियंत्रण और मजबूत मार्केट लिंकज पर विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। सह्याद्री एफपीओ राज्य में किसान समूहों को संगठित करने, नई तकनीकों से जोड़ने और निर्यात बाजार तक पहुंच दिलाने में मार्गदर्शन करेगा। इससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सकेगा।

फसल विविधीकरण पर रहेगा जोर

पंजाब सरकार का फोकस फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने पर है, ताकि धान और गेहूं के अलावा बागवानी फसलों को प्रोत्साहित किया जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि पंजाब की जलवायु और संसाधनों को देखते हुए राज्य देश का प्रमुख बागवानी हब बन सकता है। मूल्य संवर्धन, प्रोसेसिंग और निर्यात को बढ़ावा देकर किसानों के लिए टिकाऊ आय के नए अवसर तैयार किए जा सकते हैं।

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