कृषि समाचार

जून में बढ़िया बारिश ने बढ़ाई किसानों की उम्मीदें, धान की बुवाई में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, लेकिन कुछ राज्यों में कम बारिश बनी चिंता

नई दिल्ली: देश में इस साल मॉनसून ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया है। जून 2025 के महीने में देशभर में औसतन 10 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई, जो खरीफ फसलों की बुवाई के लिहाज से बेहद शुभ संकेत माना जा रहा है। कृषि अर्थव्यवस्था के लिए यह एक सकारात्मक शुरुआत है, जिससे किसानों को समय पर खेती शुरू करने का मौका मिला है। हालांकि, कुछ राज्यों में अधिक बारिश के कारण जल-जमाव और बाढ़ की स्थिति भी बनी, वहीं पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत के कुछ इलाकों में कमजोर मॉनसून ने चिंता बढ़ा दी है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, 27 जून 2025 तक देश में 262.12 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खेती की जा चुकी है, जो पिछले साल इसी अवधि के 235.44 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 26.71 लाख हेक्टेयर अधिक है। यह करीब 11.34 फीसदी की वृद्धि दर्शाता है। सबसे अधिक असर धान की खेती में देखने को मिला है, जहां बारिश के चलते रकबा 11.24 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है।

गुजरात और राजस्थान में रिकॉर्डतोड़ बारिश

इस बार मॉनसून की शुरुआत में ही पश्चिमी भारत के राज्यों में जबरदस्त बारिश देखने को मिली है। राजस्थान में सामान्य से 122 फीसदी, गुजरात में 114 फीसदी और दादरा-नगर हवेली व दमन दीव में 127 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। इन इलाकों में हुई बंपर वर्षा ने खरीफ फसलों की बुवाई के लिए बेहद अनुकूल परिस्थितियां पैदा की हैं। इसके अलावा झारखंड में 88 फीसदी और ओडिशा में 21 फीसदी अधिक बारिश के चलते कृषि गतिविधियों को बड़ा बल मिला है।

उत्तर भारत में भी मॉनसून रहा मेहरबान

उत्तर भारत के राज्यों में भी जून में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है। उत्तर प्रदेश में जहां सामान्य से 22 फीसदी अधिक 123.1 मिमी बारिश हुई, वहीं हरियाणा ने 42 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 82.3 मिमी वर्षा दर्ज की। खास बात यह रही कि 1 जुलाई को ही हरियाणा में 254 फीसदी अधिक बारिश हुई। पंजाब में जून में 77.4 मिमी बारिश हुई, जो सामान्य 58.1 मिमी से 33 फीसदी अधिक है। वहीं, हिमाचल प्रदेश में भी 58 फीसदी अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।

मध्य और पश्चिम भारत में भी झमाझम बारिश

मध्य प्रदेश में जून में सामान्य से 47 फीसदी अधिक वर्षा हुई है, जिससे वहां की खरीफ बुवाई को अच्छी शुरुआत मिली। महाराष्ट्र में जून महीने में कुल 229.0 मिमी वर्षा हुई, जो सामान्य 219.4 मिमी से 4 फीसदी अधिक है। इन दोनों राज्यों में धान, सोयाबीन और मूंगफली जैसी प्रमुख फसलों की बुवाई ने रफ्तार पकड़ी है।

दक्षिण भारत में मिलाजुला प्रदर्शन

दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में बारिश का स्तर सामान्य के आसपास रहा, जबकि कुछ जगहों पर कमी देखी गई। केरल में जून महीने में सामान्य से 7 फीसदी कम वर्षा हुई, जबकि कर्नाटक में 5 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई। तेलंगाना में स्थिति थोड़ी चिंताजनक रही, जहां सामान्य से 17 फीसदी कम वर्षा रिकॉर्ड की गई।

बिहार, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर में कम बारिश, फसलों पर असर

जून में बिहार और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में कम बारिश दर्ज की गई, जिससे इन इलाकों में धान की नर्सरी और खरीफ बुवाई पर असर पड़ सकता है। बिहार में जून में केवल 113.6 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य आंकड़ा 174.8 मिमी है, यानी 35 फीसदी की कमी। छत्तीसगढ़ में भी 14 फीसदी कम वर्षा दर्ज की गई है।

पूर्वोत्तर राज्यों में भी मॉनसून की चाल धीमी रही। अरुणाचल प्रदेश में 40 फीसदी, असम में 34 फीसदी, मेघालय में 47 फीसदी, नागालैंड में 6 फीसदी, मणिपुर में 20 फीसदी और त्रिपुरा में 14 फीसदी कम वर्षा हुई है, जिससे इन क्षेत्रों में खरीफ बुवाई की रफ्तार सुस्त पड़ सकती है।

धान और तिलहनों की बुवाई में तेजी

जून की अच्छी बारिश ने धान की खेती को जबरदस्त बढ़ावा दिया है। अब तक 35 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में धान की बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले साल इस समय तक यह आंकड़ा 23 लाख हेक्टेयर था। इसके अलावा तिलहनों की बुवाई, खासकर सोयाबीन और मूंगफली में भी उल्लेखनीय तेजी देखी गई है, जिससे किसानों को अच्छी फसल की उम्मीद है।

मॉनसून 2025 की जून की बारिश ने जहां अधिकांश राज्यों को राहत दी है और खरीफ बुवाई को रफ्तार दी है, वहीं कुछ क्षेत्रों में कम बारिश की वजह से चिंता भी बनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई और अगस्त में बारिश का यही रुख बना रहा, तो यह खरीफ सीजन देश के किसानों और कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक सुनहरा मौका साबित हो सकता है।

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