नई दिल्ली: देश में खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसान फसलों की बुवाई और उर्वरकों के उपयोग की तैयारियों में जुट गए हैं। हालांकि, बदलते कृषि परिदृश्य के बीच कृषि विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि रासायनिक खादों का अत्यधिक प्रयोग मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर रहा है और मानव स्वास्थ्य पर भी बुरा प्रभाव डाल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार यूरिया और डीएपी जैसे रसायनों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी प्रदूषित हो रही है, जिससे फसलों की गुणवत्ता घट रही है और लोगों में गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। ऐसे में खेती की टिकाऊ पद्धतियों, पर्यावरण संरक्षण और जैविक तथा वैकल्पिक उर्वरकों के प्रयोग को प्राथमिकता देना समय की मांग बन गया है।
डीएपी का बेहतर और सस्ता विकल्प है सिंगल सुपर फास्फेट
खरीफ सीजन के दौरान देशभर में डीएपी की मांग काफी बढ़ जाती है और सहकारी समितियों में किसानों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। हालांकि, कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि डीएपी एकमात्र विकल्प नहीं है और सिंगल सुपर फास्फेट यानी एसएसपी इसका एक सस्ता व अधिक फायदेमंद विकल्प है। एसएसपी में सोलह प्रतिशत फास्फोरस के साथ सल्फर भी मौजूद होता है, जो पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता, स्वाद और रंग को बेहतर बनाता है। डीएपी में सल्फर की कमी पाई जाती है जिससे फसलों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एसएसपी विशेष रूप से कपास, सोयाबीन और मिर्च जैसी फसलों के लिए अत्यंत उपयोगी है, क्योंकि यह जड़ों को मजबूत बनाकर पौधों की वृद्धि दर को बढ़ाता है।
लागत में बचत संतुलित उपयोग विधि और जैविक खेती का महत्व
कीमत के दृष्टिकोण से जहां डीएपी की एक बोरी बाजार में करीब तेरह सौ पचास से पंद्रह सौ रुपये में मिलती है, वहीं एसएसपी की बोरी मात्र तीन सौ से चार सौ रुपये में आसानी से उपलब्ध हो जाती है। इसके प्रयोग से मिट्टी की संरचना भी बेहतर बनी रहती है, जबकि डीएपी की अधिकता से जमीन सख्त हो जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार प्रति एकड़ खेत के लिए दो सौ किलोग्राम एसएसपी, पच्चीस किलोग्राम पोटाश और एक सौ चालिस से एक सौ पचास किलोग्राम यूरिया का संतुलित मिश्रण बनाकर चार बराबर भागों में फसल की आवश्यकतानुसार देना चाहिए। रासायनिक खादों पर निर्भरता घटाकर संतुलित उर्वरक प्रबंधन और जैविक विकल्पों को अपनाने से किसानों की लागत में कमी आएगी, उत्पादन बढ़ेगा और मिट्टी की सेहत भी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगी।
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