नई दिल्ली: देश के कई राज्यों में इस समय धान के खेत हरियाली से लहलहा रहे हैं और बालियां निकलनी शुरू हो गई हैं। यह वह दौर है जब किसानों की महीनों की मेहनत रंग लाने लगती है, लेकिन इसी नाजुक समय पर फसल के दो बड़े दुश्मन गंधी बग कीट और चूहे धान की फसल पर कहर बरपाने लगे हैं। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि समय रहते उपाय न किए गए तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
गंधी बग कीट: छोटा पर खतरनाक दुश्मन
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि गंधी बग कीट धान की फसल में सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। यह छोटा सा कीट धान की बालियों में बैठकर दानों का रस चूस लेता है, जिससे दाने खोखले और भुरभुरे हो जाते हैं। नतीजतन, पैदावार कम होती है और धान की क्वालिटी भी खराब हो जाती है। इस कीट की पहचान इसके शरीर से निकलने वाली तीखी बदबू से आसानी से की जा सकती है।
गंधी बग कीट से बचाव के उपाय
- फसल पर फेनवलरेट 20 ईसी जैसे रसायनों का छिड़काव करें।
- जैविक विकल्प के तौर पर नीम के तेल का स्प्रे करें।
- खेत और आसपास के खरपतवारों की नियमित सफाई करें क्योंकि ये कीटों के पनपने का मुख्य ठिकाना होते हैं।
- धान के खेतों में चूहों का आतंक
धान की बालियां निकलने के बाद खेतों में चूहों की संख्या तेजी से बढ़ जाती है। चूहे पहले नरम पौधों को नीचे से काटते हैं और फिर बालियों में लगे दानों को खा जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, चूहे प्रति एकड़ 50 किलो तक धान की फसल चट कर सकते हैं, जिससे किसानों की कमाई पर सीधा असर पड़ता है।
चूहों से बचाव के उपाय
- खेतों में पानी भरकर रखने से चूहों की संख्या घटती है।
- पुदीना और कपूर के तेल की तेज गंध से चूहे खेत से दूर रहते हैं।
- किसानों को खेतों में समय-समय पर दवाओं का उपयोग भी करना चाहिए।
किसानों के लिए अलर्ट
कृषि विभाग और विशेषज्ञ लगातार किसानों को सलाह दे रहे हैं कि धान की फसल की इस अवस्था में लापरवाही न करें। गंधी बग कीट और चूहों से बचाव के लिए जैविक और रासायनिक दोनों उपाय अपनाएं। सतर्कता और समय पर कदम उठाकर किसान अपनी मेहनत की कमाई को बचा सकते हैं।
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