नई दिल्ली: पिछले दो वर्षों से गेहूं खरीद लक्ष्य से पीछे रहने के बाद केंद्र सरकार इस बार नई रणनीति बना सकती है ताकि, इस बार लक्ष्य पूरा हो सके। गरीबों को मुफ्त अनाज वितरण के लिए केंद्र को बफर स्टॉक में पर्याप्त गेहूं की जरूरत है और इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए इस बार ज्यादा गेहूं खरीदने की योजना बनाई जा रही है। कृषि मंत्रालय ने 2023-24 के लिए गेहूं उत्पादन का लक्ष्य 114 मिलियन टन निर्धारित किया है और इस बार यह टारगेट पूरा हो सकता है क्योंकि मौसम अनुकूल है और गेहूं का रकबा सामान्य क्षेत्रफल से अधिक है।
केंद्र सरकार ने मध्य मार्च से पहले गेहूं खरीदने की योजना बनाई है और इस साल अधिकतम अनाज खरीदने का इरादा है। इसके साथ ही, सरकार गेहूं के आयात पर रोक लगाकर महंगाई को काबू में रखने का प्रयास कर रही है। पिछले साल से गेहूं की महंगाई को देखते हुए सरकार ओपन मार्केट सेल स्कीम (OMSS) लाई थी, जिसके तहत सस्ते दाम पर बाजार में गेहूं बेचा गया है। इस साल भी गेहूं को एमएसपी के तहत 2,275 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदा जाएगा।
नई रणनीति के तहत, सरकार का उद्देश्य है कि किसानों को सही दाम मिलें और गेहूं की आपूर्ति में कोई कमी नहीं हो। यह नई रणनीति किसानों को आपूर्ति करने और उन्हें आधुनिक बाजारों के साथ जोड़ने का एक प्रयास है। केंद्रीय खाद्य मंत्रालय द्वारा राज्यों के खाद्य सचिवों के साथ एक बैठक की तैयारी की जा रही है, ताकि गेहूं की खरीद की तैयारी का आकलन किया जा सके। इसके माध्यम से सरकार खाद्य सुरक्षा की स्थिति को मजबूत बनाने के लिए सही कदम उठाने का प्रयास करेगी।
गेहूं उत्पादन के आंकड़ों पर निजी क्षेत्र और सरकार के बीच मतभेद हैं, लेकिन सरकार उच्च मूल्यवर्धन और महंगाई को देखते हुए गेहूं के एक्सपोर्ट पर रोक लगा कर और OMSS के माध्यम से गरीबों को सस्ते दामों पर गेहूं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। केंद्र सरकार की नई रणनीति के तहत, गेहूं के खरीद में बढ़ोतरी का आश्वासन देने वाले इस प्रयास से किसानों को सही दाम मिलने की उम्मीद बढ़ी है और गरीबों को मुफ्त अनाज के पहुंचाने के लिए आवश्यक बफर स्टॉक के निर्माण का रास्ता साफ हो रहा है।
