पटना: देशभर के किसान जहां आज भी पारंपरिक फसलों जैसे धान, गेहूं और गन्ने की खेती पर निर्भर हैं, वहीं अब धीरे-धीरे खेती के तौर-तरीकों में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। बदलते दौर और बाजार की मांग के अनुसार, किसान अब परंपरागत खेती छोड़कर ऐसे फलों की ओर बढ़ रहे हैं जो कभी केवल पहाड़ी या विदेशी जलवायु में ही उगाए जाते थे। इन्हीं में से एक है ड्रैगन फ्रूट, जिसकी खेती अब बिहार जैसे मैदानी राज्यों में भी तेजी से बढ़ रही है। किसानों की इसी बदलती सोच को मजबूती देने के लिए बिहार सरकार ने ड्रैगन फ्रूट विकास योजना की शुरुआत की है। राज्य सरकार इस योजना के माध्यम से किसानों को न सिर्फ नई किस्म की खेती के लिए प्रेरित कर रही है, बल्कि उन्हें भारी सब्सिडी भी मुहैया करा रही है। बागवानी फसलों के बढ़ते महत्व को देखते हुए यह योजना किसानों के लिए एक आर्थिक संबल बनकर सामने आई है।
क्या है ड्रैगन फ्रूट विकास योजना?
बिहार सरकार की ओर से चल रही यह योजना राज्य में ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शुरू की गई है। कृषि विभाग के अनुसार, ड्रैगन फ्रूट की मांग न केवल स्थानीय बाजार में बल्कि देशभर में तेजी से बढ़ रही है। इसकी खेती से किसानों को अधिक आमदनी हो सकती है और बाजार में मूल्य भी पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर मिल रहा है। यही वजह है कि राज्य सरकार ने बागवानी मिशन के तहत इसे एक प्राथमिकता योजना के रूप में शामिल किया है।
कितनी मिलेगी सब्सिडी?
इस योजना के तहत किसानों को प्रति हेक्टेयर 6.75 लाख रुपये की अनुमानित लागत में से 40 प्रतिशत यानी 2.70 लाख रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। यह सब्सिडी दो किश्तों में दी जाएगी पहली किस्त में 60 प्रतिशत यानी 1.62 लाख रुपये वित्तीय वर्ष 2025-26 में, जबकि दूसरी किस्त में 40 प्रतिशत यानी 1.08 लाख रुपये 2026-27 में दी जाएगी। किसान अपनी तरफ से पौधा, संरचना और अन्य आवश्यक सामग्री की व्यवस्था कर सकते हैं। सब्सिडी का उद्देश्य ड्रैगन फ्रूट जैसी उच्च-मूल्य फसल की खेती को सुलभ और लाभकारी बनाना है।
किन जिलों को किया गया है शामिल?
बिहार सरकार ने ड्रैगन फ्रूट की खेती को प्रोत्साहन देने के लिए राज्य के 22 जिलों को इस योजना में शामिल किया है। इनमें अररिया, औरंगाबाद, बेगूसराय, भागलपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, जमुई, कैमूर, कटिहार, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मुंगेर, मुजफ्फरपुर, नवादा, पूर्णिया, रोहतास, समस्तीपुर, सीवान, सारण और शेखपुरा जिले शामिल हैं। इन जिलों के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
कैसे करें आवेदन?
ड्रैगन फ्रूट विकास योजना के तहत सब्सिडी प्राप्त करने के लिए किसान को ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके लिए कृषि विभाग की हॉर्टिकल्चर वेबसाइट पर जाना होगा। होमपेज पर ‘योजना’ अनुभाग पर क्लिक करें। वहां ‘ड्रैगन फ्रूट विकास योजना’ का विकल्प चुनें। आवेदन के लिए दिए गए फॉर्म को खोलें। आवश्यक विवरण जैसे नाम, आधार नंबर, भूमि की जानकारी, बैंक विवरण आदि भरें। फॉर्म जमा करें और भविष्य के लिए प्रिंट निकाल लें।
कहां से मिलेगी अधिक जानकारी?
अगर किसान आवेदन से पहले अधिक जानकारी लेना चाहते हैं, तो वे अपने जिले के सहायक निदेशक, उद्यान विभाग से संपर्क कर सकते हैं। वहीं जो किसान योजना, प्रक्रिया, क्षेत्रफल की सीमा और आवश्यक दस्तावेजों के बारे में जानना चाहते हैं, वे बिहार कृषि उद्यान विभाग की वेबसाइट पर जाकर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
ड्रैगन फ्रूट की खेती पर केंद्रित यह योजना न केवल किसानों को नई फसल की ओर आकर्षित कर रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी सशक्त बना रही है। उच्च लाभ, कम रोग-प्रतिरोध और कम रख-रखाव वाली इस फसल के जरिए किसान अपने खेत की आय दोगुनी करने के सपने को साकार कर सकते हैं। ऐसे में बिहार सरकार की यह पहल खेती के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत दे रही है।
