नई दिल्ली: दूध देने वाली गाय-भैंस हों या मांस उत्पादन के लिए पाले जाने वाले भेड़-बकरी, बेहतर उत्पादन के लिए उनकी रोजाना की खुराक में हरे चारे का शामिल होना बेहद जरूरी है। पशुओं को केवल एक प्रकार का चारा देने के बजाय संतुलित आहार उपलब्ध कराने से उनकी वृद्धि, दूध और मांस की गुणवत्ता के साथ उत्पादन क्षमता भी बेहतर होती है।
संतुलित आहार से बढ़ेगा पशुओं का उत्पादन
पशु पोषण विशेषज्ञों के अनुसार पशुओं की रोजाना की खुराक में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और जरूरी खनिज तत्वों का उचित संतुलन होना चाहिए। इन पोषक तत्वों की कमी होने पर पशुओं की वृद्धि और उत्पादन क्षमता प्रभावित हो सकती है। दूध और मांस के लिए पाले जाने वाले पशुओं को चारा देते समय यह समझना जरूरी है कि उपलब्ध चारे में कौन-कौन से पोषक तत्व मौजूद हैं। इसके आधार पर अलग-अलग चारे को मिलाकर संतुलित आहार तैयार किया जा सकता है। संतुलित खुराक मिलने से गाय-भैंस में दूध उत्पादन बढ़ाने और उसकी गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है। वहीं भेड़-बकरी में शरीर की वृद्धि और मांस उत्पादन बेहतर हो सकता है। इससे पशुपालकों की उत्पादन लागत को नियंत्रित करने में भी मदद मिल सकती है।
नेपियर के साथ दलहनी चारा लगाने की सलाह
सर्दियों के दौरान हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने के लिए सितंबर में चारे की तैयारी शुरू करना उपयोगी रहेगा। विशेषज्ञों के अनुसार पशुपालकों को ऐसी हरे चारे की फसल भी रखनी चाहिए, जिसे एक बार लगाने के बाद कई वर्षों तक उत्पादन लिया जा सके। नेपियर घास को बहुवर्षीय चारे के रूप में जाना जाता है। इसे एक बार लगाने के बाद करीब पांच वर्षों तक हरा चारा प्राप्त किया जा सकता है। इससे पशुपालकों को लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। हालांकि पशुओं को केवल नेपियर घास खिलाना पर्याप्त नहीं माना जाता। नेपियर के साथ दलहनी चारे को शामिल करने से पशुओं के आहार में अलग-अलग पोषक तत्वों का बेहतर संतुलन बनाया जा सकता है।
नेपियर और लोबिया से बनेगा बेहतर चारा संतुलन
सितंबर में नेपियर घास के साथ लोबिया लगाया जा सकता है। नेपियर घास से पशुओं को कार्बोहाइड्रेट मिलता है, जबकि लोबिया प्रोटीन और दूसरे जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद करता है। हर मौसम में नेपियर के साथ मौसम के अनुसार अलग-अलग हरे चारे की फसलें लगाई जा सकती हैं। इस तरह चारे की विविधता बनाए रखने से पशुओं को संतुलित पोषण उपलब्ध कराया जा सकता है। गाय और भैंस के लिए संतुलित आहार दूध उत्पादन बढ़ाने में सहायक हो सकता है, जबकि भेड़ और बकरी के लिए पर्याप्त पोषण उनकी शारीरिक वृद्धि और मांस उत्पादन को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
पशुपालक अभी से शुरू करें तैयारी
हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता पशुपालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि पशुपालक पहले से चारे की योजना तैयार करते हैं तो मौसम बदलने के दौरान हरे चारे की कमी से बचा जा सकता है। इसलिए सितंबर में लगाए जाने वाले हरे चारे की तैयारी अभी से करना पशुपालकों के लिए फायदेमंद हो सकता है। नेपियर के साथ लोबिया जैसे दलहनी चारे को शामिल करके पशुओं की पोषण संबंधी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकता है। इससे पशुओं की वृद्धि, दूध और मांस उत्पादन के साथ पशुपालन की आर्थिक दक्षता में भी सुधार की संभावना रहती है।
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