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मध्य प्रदेश में पशु एंबुलेंस सेवा से 15 लाख पशुपालकों को लाभ

animal ambulance service In MP

भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार की पशु एंबुलेंस सेवा प्रदेश के पशुपालकों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है। वर्ष 2023 में शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 15 लाख 44 हजार से अधिक पशुपालकों को लाभ मिल चुका है। वर्तमान में प्रदेश के सभी 55 जिलों में 406 आधुनिक एंबुलेंस वाहनों के जरिए यह सेवा संचालित की जा रही है। पशुपालकों को इस सुविधा का लाभ लेने के लिए केवल 1962 हेल्पलाइन पर कॉल करना होता है, जिसके बाद प्रशिक्षित स्टाफ और आवश्यक उपकरणों से लैस एंबुलेंस उनके घर तक पहुंच जाती है। इससे पशुओं को अस्पताल ले जाने की परेशानी काफी कम हो गई है।

उपचार के साथ नस्ल सुधार पर भी जोर

यह सेवा केवल बीमार पशुओं के इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा भी दी जा रही है। उन्नत नस्लों के उपयोग से पशुओं की गुणवत्ता में सुधार किया जा रहा है, जिससे दुग्ध उत्पादन बढ़ाने में मदद मिल रही है।

घर-घर पहुंच रहा टीकाकरण

पशु एंबुलेंस के माध्यम से पशुओं का नियमित टीकाकरण भी किया जा रहा है। खुरपका-मुंहपका, गला घोटू और थनैला जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए घर पर ही टीके लगाए जा रहे हैं, जिससे संक्रमण पर नियंत्रण पाया जा रहा है।

आधुनिक कॉल सेंटर से निगरानी

इस सेवा की निगरानी के लिए भोपाल में अत्याधुनिक कॉल सेंटर स्थापित किया गया है, जहां चौबीसों घंटे टीम काम कर रही है। यहां प्रतिदिन हजारों कॉल प्राप्त होती हैं और जरूरत के अनुसार एंबुलेंस तुरंत भेजी जाती है।

जीपीएस तकनीक से बढ़ी पारदर्शिता

सभी एंबुलेंस वाहनों में जीपीएस प्रणाली लगी हुई है, जिससे उनकी लोकेशन और गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। इससे सेवा की पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित हो रही है।

कम शुल्क में मिल रही सुविधा

पशुपालकों को इस सेवा के लिए नाममात्र शुल्क देना होता है। बड़े पशुओं के उपचार के लिए 150 रुपये और छोटे पशुओं के लिए 300 रुपये का शुल्क निर्धारित किया गया है। इससे अब तक पशु कल्याण कोष में बड़ी राशि जमा हो चुकी है।

टेली सेवा से मिल रही मुफ्त सलाह

इसके अलावा, टेली सेवा के माध्यम से पशु चिकित्सक फोन पर ही प्राथमिक सलाह देते हैं। यह सुविधा पूरी तरह निशुल्क है और लाखों पशुपालक इसका लाभ उठा चुके हैं। यह योजना पशुपालकों के लिए एक प्रभावी मॉडल साबित हो रही है, जिससे पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर हो रहा है और किसानों की आय बढ़ाने में भी मदद मिल रही है।

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