अबोहर: कृषि विज्ञान केंद्र फाजिल्का और आईसीएआर – केंद्रीय कटाई उपरांत अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (सिफेट) के क्षेत्रीय स्टेशन अबोहर ने फसल अवशेष प्रबंधन परियोजना के तहत किसान मेले का भव्य आयोजन किया। आईसीएआर – कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) लुधियाना के निदेशक डॉ. परविंदर श्योराण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। मेले में 1500 से अधिक किसानों ने उत्साह के साथ हिस्सा लिया और 60 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉलों के माध्यम से आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रों, खाद्य प्रसंस्करण और किसान उद्यमिता का प्रदर्शन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों को पराली प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संतुलित उर्वरक उपयोग, आधुनिक कृषि तकनीकों, खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन के प्रति जागरूक करके टिकाऊ खेती को बढ़ावा देना रहा।
60 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल बने मेले का प्रमुख आकर्षण

मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 60 से अधिक प्रदर्शनी स्टॉल रहे, जिन पर उन्नत बीज, कृषि मशीनरी, कृषि आदान, नई कृषि तकनीकें, स्वयं सहायता समूहों के उत्पाद और खाद्य प्रसंस्करण से जुड़ी गतिविधियां दिखाई गईं। इन स्टॉलों के जरिए किसानों को वैज्ञानिक तकनीकों, कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन, महिला उद्यमिता और खेती पर आधारित स्वरोजगार की संभावनाओं से परिचित कराया गया।
पराली प्रबंधन अपनाएं, पर्यावरण बचाएं
कार्यक्रम में धान की पराली जलाने से पर्यावरण को होने वाले नुकसान के प्रति किसानों को जागरूक किया गया और फसल अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया। किसानों को सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर और सरफेस सीडर जैसे आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग से पराली का खेत में ही प्रभावी प्रबंधन करने के लिए प्रेरित किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने, पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण और वायु प्रदूषण घटाने में मददगार है। इसके साथ ही फसल अवशेषों के वैकल्पिक उपयोग और उनसे अतिरिक्त आमदनी की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला गया।
प्राकृतिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग का संदेश
किसानों को प्राकृतिक खेती की अलग-अलग तकनीकों, जैविक संसाधनों के उपयोग और रासायनिक आदानों पर गैर-जरूरी निर्भरता घटाने के बारे में बताया गया। वैज्ञानिकों ने मिट्टी की जांच के आधार पर उर्वरकों का संतुलित और समझदारी भरा उपयोग करने, जल संरक्षण करने और मिट्टी की सेहत बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों को अपनाना लंबे समय तक कृषि उत्पादकता और पर्यावरण की स्थिरता के लिए जरूरी है।
खाद्य प्रसंस्करण से बढ़ेंगे रोजगार और आय के अवसर
मेले में खाद्य प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन को भी खास अहमियत दी गई। किसानों और स्वयं सहायता समूहों को कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण, गुणवत्ता सुधार, उत्पादों में विविधता लाने और खेती पर आधारित उद्यम शुरू करने की जानकारी दी गई। विशेष रूप से महिला स्वयं सहायता समूहों को स्थानीय कृषि उत्पादों से मूल्यवर्धित वस्तुएं तैयार करके स्वरोजगार और अतिरिक्त आमदनी के अवसर विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
किसानों और वैज्ञानिकों को मिला साझा मंच
किसान मेले ने किसानों, वैज्ञानिकों, कृषि उद्यमियों और स्वयं सहायता समूहों को एक साझा मंच दिया, जहां आधुनिक कृषि तकनीकों का आदान-प्रदान हुआ और किसानों को वैज्ञानिकों से सीधे संवाद का मौका मिला। कार्यक्रम के जरिए टिकाऊ खेती, पराली प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, कृषि उद्यमिता और किसानों की आय बढ़ाने का संदेश दिया गया। यह आयोजन स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ मिट्टी और समृद्ध किसान के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल रहा।
मुख्य अतिथि और गणमान्य व्यक्तियों की रही उपस्थिति

इस अवसर पर आईसीएआर – कृषि प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) लुधियाना के निदेशक डॉ. परविंदर श्योराण मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उनके साथ केवीके फाजिल्का के प्रमुख व वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार अहलावत, डॉ. राजेश कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अमित नाथ, डॉ. अनिल सांगवान, डॉ. जे.के. अरोड़ा और डॉ. मनदीप सिंह सहित कई वैज्ञानिक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में मरखाई के श्री कुलदीप सिंह शेरगिल, श्री कुलवंत सिंह और आईएएस अधिकारी श्री सुब्रत सिंह बलोत शामिल हुए।
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