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प्याज की खुदरा कीमतों में गिरावट, 126 शहरों में उपभोक्ताओं को मिली राहत

Retail onion prices fall, bringing relief to consumers in 126 cities

नई दिल्ली: देशभर में प्याज की बढ़ती उपलब्धता का असर अब मंडियों से लेकर खुदरा बाजारों तक दिखाई देने लगा है। खरीफ प्याज की नई फसल की आवक बढ़ने, पहले से भंडारित प्याज की उपलब्धता और केंद्र सरकार की ओर से बफर स्टॉक से लगातार आपूर्ति किए जाने के कारण कीमतों में नरमी आई है। सरकार के अनुसार, पिछले दो सप्ताह के दौरान देश के 126 शहरों में प्याज की खुदरा कीमतों में गिरावट दर्ज की गई है। वहीं, महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में भी प्याज की औसत भारित कीमत में करीब 13 प्रतिशत की कमी आई है। आगामी त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए सरकार आपूर्ति, भंडार और कीमतों पर नजर बनाए हुए है। नई फसल की आवक बढ़ने से आने वाले सप्ताहों में बाजार में प्याज की उपलब्धता और बेहतर होने की उम्मीद है।

खरीफ प्याज की नई फसल से बढ़ेगी बाजार में आपूर्ति

देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों से खरीफ प्याज की नई फसल बाजार में पहुंचने लगी है। सरकार के अनुसार, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से मंडियों में नई फसल की आवक शुरू हो गई है। आने वाले सप्ताहों में इन क्षेत्रों से आपूर्ति बढ़ने की संभावना है, जिससे बाजार में प्याज की उपलब्धता को मजबूती मिल सकती है। नई फसल के साथ पहले से भंडारित प्याज भी बाजार की मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। जब मंडियों में नई उपज और भंडारित प्याज दोनों की आपूर्ति बढ़ती है, तो थोक बाजार में उपलब्धता बेहतर होती है और कीमतों पर दबाव पड़ सकता है। सरकार को उम्मीद है कि नई फसल की बढ़ती आवक से त्योहारों के दौरान उपभोक्ताओं की मांग पूरी करने में मदद मिलेगी।

पिछले साल के मुकाबले खरीफ प्याज का रकबा पांच प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान

इस वर्ष देश में खरीफ प्याज की खेती का रकबा पिछले वर्ष के मजबूत स्तर की तुलना में लगभग पांच प्रतिशत अधिक रहने का अनुमान है। प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में फसल की स्थिति भी अनुकूल बताई गई है। इसका असर आने वाले समय में प्याज की कुल उपलब्धता पर पड़ सकता है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, कटाई की अवधि के दौरान प्रमुख प्याज उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक बारिश की आशंका नहीं है। इससे किसानों को फसल की कटाई, सुखाने और मंडियों तक पहुंचाने में सुविधा मिलने की उम्मीद है। प्याज की कटाई के बाद उचित तरीके से सुखाना और उसका परिवहन करना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि अधिक नमी के कारण प्याज के खराब होने की आशंका बढ़ सकती है। यदि मौसम अनुकूल बना रहता है और फसल की आवक सुचारु रूप से होती है, तो बाजार में आपूर्ति बेहतर रहने की संभावना है।

महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की कीमतों में 13 प्रतिशत गिरावट

प्याज की नई फसल की आवक बढ़ने का असर महाराष्ट्र की प्रमुख मंडियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दिया है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र की मंडियों में प्याज की औसत भारित कीमत 16 सितंबर को लगभग 4,030 रुपये प्रति क्विंटल थी। तीन अक्टूबर तक यह घटकर करीब 3,475 रुपये प्रति क्विंटल रह गई। इस तरह संबंधित अवधि में कीमतों में लगभग 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। मंडियों में प्याज की आपूर्ति मजबूत होने से थोक कीमतों पर दबाव बढ़ा है। महाराष्ट्र देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्यों में शामिल है, इसलिए यहां की मंडियों में आवक और कीमतों में होने वाले बदलाव का असर व्यापक बाजार पर भी पड़ सकता है। हालांकि, अलग-अलग मंडियों में प्याज की गुणवत्ता, आकार, उपलब्धता और स्थानीय मांग के अनुसार कीमतों में अंतर बना रह सकता है।

खुदरा बाजारों में भी घटे प्याज के दाम

थोक मंडियों में कीमतों में आई नरमी का असर खुदरा बाजारों में भी दिखाई देने लगा है। पिछले दो सप्ताह के दौरान देश के 126 शहरों में प्याज की खुदरा कीमतों में एक रुपये से लेकर 21 रुपये प्रति किलोग्राम तक की गिरावट दर्ज की गई है। तमिलनाडु, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में प्याज के दाम घटने का रुझान सामने आया है। खुदरा कीमतों में गिरावट से घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, क्योंकि प्याज रोजमर्रा के भोजन में इस्तेमाल होने वाली प्रमुख सब्जियों में शामिल है। हालांकि, उपभोक्ताओं को मिलने वाली वास्तविक राहत शहर, बाजार, प्याज की गुणवत्ता और खुदरा विक्रेताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए सभी शहरों में एक जैसी कीमत होने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

बफर स्टॉक से 123 शहरों में पहुंचाया गया प्याज

बाजार में प्याज की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए केंद्र सरकार अपने बफर स्टॉक से भी प्याज की आपूर्ति कर रही है। सरकार के अनुसार, अब तक आठ ‘कांदा एक्सप्रेस’ और 467 ट्रकों के माध्यम से 123 शहरों में दो लाख क्विंटल से अधिक प्याज पहुंचाया जा चुका है। इस व्यवस्था का उद्देश्य उन बाजारों में अतिरिक्त आपूर्ति उपलब्ध कराना है, जहां खपत अधिक है या कीमतों में तेजी आने की आशंका रहती है। बफर स्टॉक से प्याज जारी करने से नई फसल की आवक के बीच बाजार में उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसके साथ ही सरकार बाजार की मांग के अनुसार विभिन्न शहरों तक प्याज पहुंचाने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रही है।

अधिक खपत वाले बाजारों तक रेल के जरिए पहुंचेगा प्याज

त्योहारों के दौरान प्याज की मांग बढ़ने की संभावना को देखते हुए अधिक खपत वाले बाजारों तक बड़ी मात्रा में प्याज पहुंचाने के लिए अतिरिक्त रेल डिब्बों के संचालन की योजना भी बनाई जा रही है। रेल के माध्यम से बड़ी खेप भेजने से लंबी दूरी के बाजारों तक प्याज की आपूर्ति बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, ट्रकों के जरिए भी जरूरत के अनुसार प्याज विभिन्न शहरों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार की कोशिश है कि जिन क्षेत्रों में मांग अधिक हो, वहां समय पर पर्याप्त मात्रा में प्याज उपलब्ध कराया जाए। हालांकि, इस व्यवस्था का वास्तविक असर स्थानीय बाजारों में पहुंचने वाली खेप, परिवहन व्यवस्था और मांग की स्थिति पर निर्भर करेगा।

त्योहारों से पहले कीमतों और भंडार पर नजर

आगामी त्योहारों के दौरान सब्जियों की मांग में बदलाव आ सकता है। ऐसे में प्याज की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों में अनावश्यक तेजी को रोकना सरकार के लिए महत्वपूर्ण है। खरीफ प्याज की नई फसल, पहले से भंडारित उपज और बफर स्टॉक से नियमित आपूर्ति को बाजार की जरूरतों के अनुरूप इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार मंडियों में प्याज की आवक, उपलब्ध भंडार और खुदरा कीमतों पर निगरानी रख रही है, ताकि जरूरत के अनुसार आपूर्ति संबंधी कदम उठाए जा सकें। यदि नई फसल की आवक अनुमान के अनुसार बढ़ती है और मौसम अनुकूल रहता है, तो आने वाले सप्ताहों में बाजार में प्याज की उपलब्धता मजबूत हो सकती है।

किसानों और उपभोक्ताओं के लिए क्या संकेत हैं?

प्याज की कीमतों में मौजूदा गिरावट उपभोक्ताओं के लिए राहत का संकेत है, जबकि किसानों के लिए मंडियों में कीमतों और आवक पर नजर रखना महत्वपूर्ण रहेगा। अधिक आपूर्ति के कारण थोक कीमतों में कमी आने पर किसानों को मिलने वाले भाव प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, पर्याप्त आपूर्ति से उपभोक्ताओं को प्याज अपेक्षाकृत कम कीमत पर मिलने की संभावना बढ़ सकती है। आने वाले समय में कीमतों की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि नई फसल कितनी मात्रा में बाजार में पहुंचती है, मांग कैसी रहती है और सरकारी बफर स्टॉक से कितनी आपूर्ति की जाती है। इसलिए फिलहाल कीमतों में आगे कितनी गिरावट आएगी, इसका निश्चित अनुमान लगाना संभव नहीं है।

कुल मिलाकर, खरीफ प्याज की नई फसल की आवक, भंडारित प्याज की उपलब्धता और सरकारी बफर स्टॉक से आपूर्ति बढ़ने के कारण देश के कई बाजारों में कीमतों में नरमी आई है। महाराष्ट्र की मंडियों से लेकर देश के 126 शहरों के खुदरा बाजारों तक गिरावट का रुझान सामने आया है। आने वाले सप्ताहों में फसल की आवक और सरकारी आपूर्ति की स्थिति यह तय करेगी कि त्योहारों के दौरान प्याज की कीमतें किस स्तर पर बनी रहती हैं।

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