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महाराष्ट्र में 10 हजार किसानों से शुरू होगा एआई आधारित स्मार्ट खेती प्रोजेक्ट

AI farming will start with 10,000 farmers in Maharashtra

मुंबई: महाराष्ट्र सरकार खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की तैयारी कर रही है। राज्य में कृषि उत्पादन बढ़ाने, पानी की बचत करने और किसानों की लागत कम करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता, उपग्रह तकनीक, ड्रोन, इंटरनेट आधारित सेंसर और आंकड़ा विश्लेषण जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसके लिए शुरुआती चरण में 10 हजार किसानों को शामिल कर प्रायोगिक परियोजना शुरू की जाएगी। मुंबई के सह्याद्रि अतिथि गृह में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई बैठक में खेती में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल ट्विन आधारित सीख परियोजना का प्रस्तुतिकरण किया गया। मुख्यमंत्री ने परियोजना की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

इन फसलों पर रहेगा मुख्य फोकस

प्रायोगिक परियोजना में महाराष्ट्र की प्रमुख फसलों को शामिल किया जाएगा। इनमें कपास, सोयाबीन, अरहर, गन्ना, संतरा, हल्दी, प्याज और मक्का प्रमुख हैं। परियोजना के तहत अलग-अलग फसलों और क्षेत्रों की जरूरत के अनुसार किसानों को खेती संबंधी सलाह देने की योजना है। इसके लिए फसल की बढ़त, मिट्टी में नमी, पानी की आवश्यकता, मौसम की स्थिति, कीट और रोगों का खतरा तथा संभावित उत्पादन से जुड़ा आंकड़ा जुटाया जाएगा। इस आंकड़े का कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन आधारित सीख तकनीक के माध्यम से विश्लेषण किया जाएगा। इससे किसानों को उनके खेत की वास्तविक स्थिति के आधार पर सलाह देने में मदद मिलेगी।

खेत के हिसाब से मिलेगी खेती की सलाह

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने के लिए केवल सामान्य कृषि सलाह देना पर्याप्त नहीं है। किसानों को उनकी फसल और खेत की परिस्थितियों के अनुसार सटीक सलाह मिलनी चाहिए। कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से किसानों को यह जानकारी देने का प्रयास किया जाएगा कि फसल में कब और कितनी सिंचाई की जरूरत है। साथ ही कीट या रोग का खतरा बढ़ने पर समय रहते बचाव के उपाय अपनाने की सलाह दी जा सकेगी। इससे अनावश्यक सिंचाई, खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल को कम करने में मदद मिल सकती है। परिणामस्वरूप खेती की लागत घटाने और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की संभावना है।

सिंचाई में 42 फीसदी पानी बचाने का दावा

परियोजना में कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिंचाई प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। कृषि विकास ट्रस्ट, बारामती के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नीलेश नलावडे के अनुसार, गन्ने पर किए गए एक प्रायोगिक अध्ययन में उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। उन्होंने बताया कि 200 किसानों में से 164 किसानों के सही आंकड़ों के आधार पर औसत उत्पादन 65.45 टन प्रति एकड़ से बढ़कर 73.12 टन प्रति एकड़ हुआ। उनके अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिंचाई प्रबंधन से औसतन 42 प्रतिशत पानी की बचत हुई। इसके अलावा प्रतिदिन प्रति हेक्टेयर करीब 90 हजार लीटर पानी बचाने की क्षमता भी सामने आई है।

ड्रोन से मिलेगी कीट और रोग की शुरुआती जानकारी

परियोजना में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाएगा। ड्रोन के जरिए खेतों की तस्वीरें और जरूरी आंकड़े जुटाए जाएंगे, जिनका कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन आधारित सीख तकनीक से विश्लेषण किया जाएगा। इससे फसल में कीट और रोग के शुरुआती संकेतों की पहचान करने में मदद मिल सकती है। प्राप्त जानकारी किसानों के मोबाइल फोन तक पहुंचाई जा सकती है, जिससे वे समय रहते सिंचाई, खाद और फसल सुरक्षा से जुड़े फैसले ले सकेंगे।

सफल रहा तो पूरे महाराष्ट्र में लागू होगा मॉडल

सरकार पहले चरण में 10 हजार किसानों और चयनित फसलों पर इस तकनीकी मॉडल का परीक्षण करेगी। परियोजना के परिणाम सकारात्मक रहने पर इसे राज्य के दूसरे हिस्सों में भी विस्तार देने की योजना है। कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल ट्विन जैसी तकनीकें खेती के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकती हैं। यदि यह पहल सफल रहती है तो किसानों को खेत की जरूरत के अनुसार सटीक सलाह मिलने के साथ पानी की बचत, उत्पादन में सुधार और खेती की लागत कम करने में मदद मिल सकती है।

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