मध्य प्रदेश: मध्य प्रदेश में मूंग की खरीद को लेकर किसानों और सरकार के बीच एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। कुछ दिनों पहले किसानों ने मूंग की खरीद का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की मांग को लेकर आंदोलन किया था। आंदोलन के बाद सरकार और किसानों के बीच सहमति बनी और खरीदी का कोटा बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने यानी प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग खरीदने पर समझौता हुआ। हालांकि, आंदोलन खत्म होने के अगले ही दिन खरीदी केंद्रों पर किसानों को अलग स्थिति का सामना करना पड़ा। किसानों का आरोप है कि केंद्रों पर प्रति एकड़ 3 क्विंटल के बजाय अधिकतम 2 क्विंटल 88 किलो मूंग की ही तुलाई की जा रही है।
3 क्विंटल के समझौते पर 2.88 क्विंटल की तुलाई क्यों?
किसानों का कहना है कि सरकार के साथ हुए समझौते में प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग खरीदने की बात स्पष्ट रूप से तय हुई थी। लेकिन खरीदी केंद्रों पर 50 किलो की बोरियों के हिसाब से तुलाई की व्यवस्था होने के कारण किसान पूरी निर्धारित मात्रा नहीं बेच पा रहे हैं। किसानों के मुताबिक 3 क्विंटल यानी 300 किलो मूंग की जगह अधिकतम 288 किलो यानी 2.88 क्विंटल की ही तुलाई हो रही है। इस तरह प्रति एकड़ किसान को 12 किलो मूंग की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
बोरी की व्यवस्था बनी परेशानी
किसानों का आरोप है कि खरीदी केंद्रों पर निर्धारित मात्रा और बोरियों की क्षमता के बीच तालमेल नहीं बैठ रहा है। इसका सीधा असर किसानों की बिक्री पर पड़ रहा है। किसान चाहते हैं कि सरकार ऐसी व्यवस्था करे, जिससे समझौते के मुताबिक 300 किलो मूंग की पूरी तुलाई हो सके।
छोटे किसानों पर ज्यादा असर
इस व्यवस्था का सबसे ज्यादा असर छोटे किसानों पर पड़ने की बात कही जा रही है। एक एकड़ में मूंग की खेती करने वाला किसान 3 क्विंटल तक मूंग बेचने की उम्मीद लेकर खरीदी केंद्र पहुंचता है, लेकिन तुलाई व्यवस्था के कारण उसकी पूरी निर्धारित मात्रा की खरीद नहीं हो पा रही है। किसानों के अनुसार कुछ मामलों में एक एकड़ की उपज में करीब ढाई क्विंटल तक ही मूंग की तुलाई हो पा रही है। ऐसे में बची हुई मूंग को बेचने के लिए किसानों को खुले बाजार का रुख करना पड़ सकता है, जहां उन्हें सरकारी खरीद की तुलना में कम कीमत मिलने का जोखिम रहता है।
किसान बोले- समझौते में 3 क्विंटल तय हुआ था
किसान महापंचायत के प्रदेश अध्यक्ष राजेश धाकड़ का कहना है कि किसानों और सरकार के बीच प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग खरीदी पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद खरीदी केंद्रों पर 2 क्विंटल 88 किलो तक ही मूंग की तुलाई की जा रही है। किसानों का कहना है कि इससे समझौते का उद्देश्य ही प्रभावित हो रहा है।एक किसान ने भी खरीदी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि समझौते में 3 क्विंटल मूंग खरीदने की बात हुई थी, लेकिन केंद्र पर 2.88 क्विंटल की ही तुलाई की जा रही है। किसानों के मुताबिक इसका सबसे अधिक नुकसान छोटे किसानों को उठाना पड़ रहा है।
खरीदी केंद्र पर व्यवस्था को लेकर उठे सवाल
मूंग खरीदी की व्यवस्था को लेकर किसानों की शिकायत के बाद बरेली स्थित मानिक एग्रो वेयरहाउस में भी स्थिति को समझने की कोशिश की गई। किसानों का कहना है कि आंदोलन के बाद 60 प्रतिशत खरीदी यानी प्रति एकड़ 3 क्विंटल की सहमति बनी थी, लेकिन केंद्र पर मौजूद तुलाई व्यवस्था के कारण किसान निर्धारित मात्रा बेचने में परेशानी महसूस कर रहे हैं।
समझौते के मुताबिक पूरी खरीदी की मांग
किसानों की मांग है कि सरकार इस व्यवस्था को तत्काल स्पष्ट करे और यह सुनिश्चित करे कि पात्र किसानों से प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग की पूरी खरीद हो। किसानों का कहना है कि यदि निर्धारित मात्रा से कम मूंग खरीदी जाती है तो आंदोलन के बाद हुआ समझौता राहत देने के बजाय नई समस्या पैदा कर देगा।
सरकार से व्यवस्था में बदलाव की मांग
मूंग खरीदी को लेकर किसानों में पहले से नाराजगी थी। शुरुआती 25 प्रतिशत खरीदी को बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की मांग को लेकर किसानों ने आंदोलन किया था। इसके बाद 60 प्रतिशत खरीदी यानी प्रति एकड़ 3 क्विंटल पर सहमति बनने के बाद आंदोलन समाप्त हुआ। अब 2.88 क्विंटल तक तुलाई का मुद्दा सामने आने से किसानों में दोबारा असंतोष बढ़ रहा है। किसान चाहते हैं कि सरकार खरीदी केंद्रों की तुलाई व्यवस्था की समीक्षा करे और समझौते के अनुसार प्रति एकड़ 3 क्विंटल मूंग की पूरी मात्रा खरीदने की व्यवस्था सुनिश्चित करे, ताकि किसानों को अपनी उपज का नुकसान न उठाना पड़े।
ये भी पढ़ें: बिहार में गन्ने की खेती का विस्तार, 2.55 लाख हेक्टेयर में बुआई का लक्ष्य

