पटना: बिहार के मत्स्य किसानों और मछुआरों के लिए नई संभावनाओं का मार्ग खुल गया है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के पूर्वी अनुसंधान परिसर, पटना और बिहार सहकारी मत्स्य महासंघ के बीच 30 जून 2026 को एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक तकनीक और सहकारी व्यवस्था के माध्यम से राज्य के मत्स्य क्षेत्र को अधिक मजबूत बनाना तथा मत्स्य किसानों की आय में वृद्धि करना है।
वैज्ञानिक तकनीक से बढ़ेगा मत्स्य उत्पादन
यह समझौता बिहार सहकारी मत्स्य महासंघ की बोर्ड बैठक के दौरान संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि बिहार के विशाल जल संसाधन राज्य की आर्थिक प्रगति के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं। उन्होंने मछली, मखाना और सिंघाड़ा की एकीकृत खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया। विशेषज्ञों के अनुसार इस साझेदारी के माध्यम से आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों, अनुसंधान और प्रशिक्षण को सीधे मत्स्य किसानों तक पहुंचाया जाएगा, जिससे उत्पादन बढ़ाने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
किसानों को मिलेगा आधुनिक प्रशिक्षण
समझौते के तहत मत्स्य उत्पादन बढ़ाने, उन्नत प्रजातियों के विकास, आधुनिक तकनीकों के प्रसार, किसानों के प्रशिक्षण तथा मत्स्य आधारित उद्यमों को प्रोत्साहन देने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही एकीकृत मत्स्य पालन, झींगा पालन, जैविक टैंक आधारित मत्स्य पालन, अजोला उत्पादन, सजावटी मत्स्य पालन तथा घरेलू स्तर पर मत्स्य बीज उत्पादन जैसी आधुनिक तकनीकों के विस्तार पर भी कार्य किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि राज्य के लगभग आठ लाख हेक्टेयर जल क्षेत्र का वैज्ञानिक ढंग से उपयोग किया जाए तो मत्स्य उत्पादन और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है।
रोजगार और आय बढ़ाने पर रहेगा जोर
इस पहल से मत्स्य किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ-साथ नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। सजावटी मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और जल संसाधनों के बेहतर उपयोग के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई है। कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि मत्स्यजीवी समुदाय राज्य की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ आपदा प्रबंधन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
चौर भूमि बन रही आय का नया स्रोत
बिहार सरकार की चौर विकास योजना के तहत पिछले तीन वर्षों में बेकार पड़ी चौर भूमि को मत्स्य पालन के लिए विकसित किया गया है। योजना के अंतर्गत लगभग 2,721.73 हेक्टेयर क्षेत्र में आधुनिक तालाबों का निर्माण किया गया है, जिससे हजारों किसानों और मछुआरों को लाभ मिला है। सालभर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए हजारों नलकूप भी स्थापित किए गए हैं, जिससे मत्स्य पालन को निरंतर बढ़ावा मिल रहा है।
मछली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी
राज्य में मत्स्य उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 2024-25 में जहां मछली उत्पादन 9.69 लाख मीट्रिक टन था, वहीं वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 10.28 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। इससे बिहार आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के साथ निर्यात की संभावनाओं को भी मजबूत कर रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
विशेषज्ञों का मानना है कि वैज्ञानिक तकनीक, आधुनिक प्रशिक्षण और जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग से मत्स्य पालन राज्य के किसानों के लिए आय का प्रमुख स्रोत बन सकता है। सरकार भी इस योजना का विस्तार करने की तैयारी में है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और मत्स्य क्षेत्र के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।
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