कृषि पिटारा

गेहूं के दाम दबाव में, समर्थन मूल्य से नीचे बिक रही फसल

wheat procurement

नई दिल्ली: देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में पिछले कई महीनों से गेहूं के दाम दबाव में बने हुए हैं, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है। किसानों को उम्मीद थी कि सरकारी खरीद शुरू होने के बाद बाजार में भाव सुधरेंगे, लेकिन मार्च से मई तक के आंकड़े बताते हैं कि अधिकांश राज्यों में कीमतें समर्थन मूल्य से नीचे ही बनी रहीं।

केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र 2026-27 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन बाजार में किसानों को इससे कम दाम पर ही फसल बेचनी पड़ी। सरकारी पोर्टल एगमार्कनेट के आंकड़े इस स्थिति की पुष्टि करते हैं।

तीन महीनों में भी नहीं मिला समर्थन मूल्य

मार्च 2026 में देश का औसत गेहूं भाव 2495.49 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो समर्थन मूल्य से लगभग 90 रुपये कम था। इस दौरान उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में किसानों को और भी कम दाम मिले। अप्रैल में कुछ सुधार जरूर देखने को मिला, लेकिन राष्ट्रीय औसत 2539.37 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो समर्थन मूल्य से नीचे ही रहा।

मई में भी हालात में बड़ा बदलाव नहीं आया। इस महीने औसत भाव 2551.05 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया, जो समर्थन मूल्य से लगभग 34 रुपये कम रहा। हालांकि पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में कीमतें समर्थन मूल्य से ऊपर रहीं, लेकिन अन्य राज्यों में किसानों को राहत नहीं मिल सकी।

उत्पादन बढ़ा, मांग कमजोर रही

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार अधिक उत्पादन, सरकारी खरीद की धीमी शुरुआत और बाजार में कमजोर मांग के कारण गेहूं के दाम दबाव में रहे। इसके अलावा मौसम की मार, जैसे बारिश और ओलावृष्टि, ने भी फसल की गुणवत्ता को प्रभावित किया, जिससे निजी मंडियों में किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। सरकार ने गुणवत्ता मानकों में कुछ छूट जरूर दी, लेकिन इसका लाभ सभी किसानों तक नहीं पहुंच सका।

सरकारी खरीद में आगे रहे कुछ राज्य

सरकारी खरीद के आंकड़ों में पंजाब और हरियाणा सबसे आगे रहे। पंजाब में 122 लाख मीट्रिक टन से अधिक और हरियाणा में 72 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीद की गई। मध्य प्रदेश में भी 100 लाख टन से अधिक खरीद हुई, जहां किसानों को बोनस का लाभ भी मिला।

उत्तर प्रदेश और बिहार में खरीद प्रक्रिया जारी है, जबकि राजस्थान में सबसे पहले 10 मार्च से खरीद शुरू की गई थी और यह 30 जून तक जारी रहेगी। वहां किसानों को अतिरिक्त बोनस भी दिया जा रहा है।

किसानों की उम्मीदों को झटका

लगातार तीन महीनों तक समर्थन मूल्य से नीचे दाम मिलने से किसानों की उम्मीदों को झटका लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाजार में मांग नहीं बढ़ी और खरीद व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में भी किसानों को इसी तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।

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