नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी के रामलीला मैदान में संयुक्त किसान मोर्चा द्वारा किसान पंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में किसान शामिल हुए। बीती रात हुई बारिश और प्रतिकूल मौसम के बावजूद किसानों का उत्साह कम नहीं हुआ और वे अपनी मांगों को लेकर मैदान में डटे रहे। किसान नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह पंचायत नई मांगों के लिए नहीं, बल्कि पहले किए गए वादों को याद दिलाने के उद्देश्य से आयोजित की गई है।
सरकार के अधूरे वादों को लेकर उठी आवाज
किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों ने समय-समय पर किसानों से कई वादे किए, लेकिन उन्हें अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। इसी मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए देशभर से किसान दिल्ली पहुंचे। पंचायत के बाद प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा, जिसमें विभिन्न गांवों से पारित प्रस्तावों की प्रतियां शामिल थीं।
समर्थन मूल्य कानून बना मुख्य मुद्दा
रामलीला मैदान में आयोजित किसान पंचायत में न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। किसान नेताओं ने कहा कि पूर्व में किए गए वादों के बावजूद इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। साथ ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुसार लागत पर लाभ जोड़कर मूल्य तय करने की बात भी दोहराई गई।
कर्जमाफी और व्यापार समझौते पर सवाल
किसान नेताओं ने कर्जमाफी के मुद्दे पर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि बड़े उद्योगों के कर्ज माफ किए गए, जबकि किसानों के मामले में संसाधनों की कमी बताई जाती है। इसके अलावा प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौते को लेकर भी चिंता जताई गई। उन्होंने कहा कि यदि कृषि और खाद्य उत्पादों पर आयात शुल्क में छूट दी गई तो इसका सीधा असर किसानों की आय पर पड़ेगा।
खुले मंच पर चर्चा की मांग
किसान नेताओं ने केंद्रीय कृषि मंत्री से खुले मंच पर चर्चा करने की मांग करते हुए सरकार से समय, स्थान और तिथि तय करने का आग्रह किया। पंचायत में देश के विभिन्न राज्यों के किसान नेताओं की मौजूदगी ने इस आयोजन को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया, जहां किसानों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की।
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