खेती-किसानी

बरसीम की खेती: दूध उत्पादन और कमाई का सुनहरा अवसर

Plant care in winter

नई दिल्ली: देशभर में पशुपालन करने वाले किसान अपने पशुओं की लगभग सभी जरूरतें पूरी कर लेते हैं, लेकिन हरे चारे की कमी हमेशा उनकी सबसे बड़ी समस्या बनी रहती है। बरसात या गर्मी में अक्सर हरा चारा उपलब्ध नहीं होता, जिससे पशुओं के दूध उत्पादन पर असर पड़ता है। ऐसे में पशुपालकों के लिए बरसीम की खेती किसी वरदान से कम नहीं है। बरसीम एक पोषक तत्वों से भरपूर चारे की फसल है, जो पशुओं को ऊर्जा और संतुलित आहार प्रदान करती है। खास बात यह है कि बरसीम का चारा खिलाने से दूध उत्पादन में बढ़ोतरी होती है और पशु स्वस्थ रहते हैं।

राष्ट्रीय बीज निगम ने पशुपालकों की सुविधा के लिए बरसीम की ‘BL-43’ किस्म के बीज की बिक्री शुरू कर दी है। किसान इसे ओएनडीसी के ऑनलाइन स्टोर से आसानी से खरीद सकते हैं और घर पर डिलीवरी पा सकते हैं। इसके अलावा, इस प्लेटफॉर्म पर किसानों को अन्य फसलों के बीज भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

BL-43 बरसीम की खासियत

बरसीम की यह किस्म ठंड के साथ गर्मी के मौसम में भी आसानी से उगाई जा सकती है। अगेती पैदावार देने वाली इस किस्म की पहली कटाई बुवाई के 40 दिनों बाद हो जाती है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रति एकड़ जमीन से 52 टन तक हरे चारे की उपज प्राप्त की जा सकती है। यह फसल लंबे समय तक लगातार चारे की आपूर्ति देती है, जिससे किसानों को चारे की चिंता नहीं करनी पड़ती।

बीज की कीमत और उपलब्धता

पशुपालक BL-43 बरसीम के बीज को राष्ट्रीय बीज निगम की वेबसाइट से ऑनलाइन खरीद सकते हैं। फिलहाल 2 किलो का पैकेट 16% छूट के साथ मात्र 500 रुपये में उपलब्ध है। किसान इस बीज को ऑर्डर करके आसानी से अपने घर पर मंगवा सकते हैं और पशुओं के लिए संतुलित चारे की व्यवस्था कर सकते हैं।

कैसे करें बरसीम की खेती?

बरसीम की खेती के लिए दोमट या चिकनी दोमट मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है, जिसमें पानी की निकासी की व्यवस्था हो। बुवाई से पहले खेत की गहरी जुताई करके उसे समतल करना चाहिए और उसमें सड़ी हुई गोबर की खाद डालनी चाहिए। बीज को राइजोबियम कल्चर से उपचारित करके छिटककर बोना सबसे बेहतर तरीका है। सितंबर-अक्टूबर महीना बरसीम की बुवाई के लिए उपयुक्त समय है। पहली कटाई 30–35 दिनों में हो जाती है और इसके बाद नियमित अंतराल पर कई कटाइयां ली जा सकती हैं।

बरसीम न केवल पशुओं के लिए पौष्टिक आहार है बल्कि किसानों के लिए आय का एक अतिरिक्त स्रोत भी बन सकता है। किसान चारे को बेचकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं। इस तरह BL-43 बरसीम की खेती पशुपालकों के लिए दूध उत्पादन बढ़ाने और बेहतर मुनाफा कमाने का सुनहरा अवसर है।

यह भी पढ़ें: सितंबर में RH-761 सरसों की खेती, जानें बीज और पैदावार

Related posts

Leave a Comment