नई दिल्ली: देशभर के किसान अब पारंपरिक फसलों से हटकर औषधीय फसलों की ओर रुख कर रहे हैं, और इसका एक बड़ा कारण है – कम लागत में अधिक मुनाफा। इस बदलाव की अगली कड़ी में अब खस की खेती चर्चा में है। खस जिसे वैज्ञानिक भाषा में वेटिवर (Vetiver) कहा जाता है, एक झाड़ीनुमा औषधीय पौधा है जो अपनी जड़ों से निकलने वाले सुगंधित तेल के लिए जाना जाता है। इस तेल की कीमत बाजार में 20 से 25 हजार रुपये प्रति लीटर तक पहुंच जाती है।
खस: हर भाग बनाता है कमाई का जरिया
खास बात यह है कि खस के पौधे का हर हिस्सा जैसे – जड़, पत्ती और फूल उपयोगी है। इसकी जड़ों से निकलने वाला सुगंधित तेल शरबत, पान मसाला, इत्र, तंबाकू, साबुन और सौंदर्य प्रसाधनों में इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा, सूखी जड़ों को लिनन और कपड़ों में सुगंध के लिए भी उपयोग किया जाता है। वहीं, पत्तियां चारा, फूस और ईंधन के रूप में काम आती हैं।
किन क्षेत्रों के लिए सबसे उपयुक्त?
खस की खेती उन क्षेत्रों में विशेष रूप से लाभकारी है जहां बाढ़, सूखा या पथरीली जमीन के चलते अन्य फसलों की खेती मुश्किल होती है। यह फसल हर प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है और इसे बहुत अधिक सिंचाई या खाद की आवश्यकता नहीं होती। इसलिए यह बंजर या आपदा-प्रभावित इलाकों में भी अच्छी पैदावार देती है।
कैसे करें खस की खेती?
खस की खेती की प्रक्रिया भी सरल है। इसकी बुवाई के लिए खेत को 2-3 बार जोतकर समतल किया जाता है और सड़ी हुई गोबर की खाद 10 से 15 टन प्रति हेक्टेयर की दर से डाली जाती है। बुवाई के लिए इसके गुच्छों (स्लिप्स) का उपयोग किया जाता है। एक बार रोपाई के बाद पहली खुदाई 12 से 14 महीने में होती है, लेकिन अच्छी गुणवत्ता और अधिक तेल के लिए दिसंबर में खुदाई करना उपयुक्त माना जाता है।
सिंचाई और पोषण की जरूरतें
हालांकि खस को अधिक पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन सूखे क्षेत्रों में बेहतर उत्पादन के लिए 6 से 8 बार सिंचाई की आवश्यकता होती है। खाद के रूप में प्रति हेक्टेयर 120 किलो नाइट्रोजन, 60 किलो फास्फोरस और 40 किलो पोटाश दिया जाना चाहिए। फास्फोरस और पोटाश की पूरी खुराक खेत तैयार करते समय देनी चाहिए, जबकि नाइट्रोजन को दो बराबर भागों में 3-3 महीने के अंतराल पर देना चाहिए।
कमाई का गणित
खस की खेती में प्रति एकड़ लागत लगभग 60 से 65 हजार रुपये आती है। एक एकड़ जमीन से करीब 10 किलो तक खस का तेल निकाला जा सकता है, जिसकी कीमत लगभग 20 हजार रुपये प्रति किलो तक जाती है। यानी किसान एक एकड़ से लगभग 2 लाख रुपये तक की कमाई कर सकता है। अगर किसान बड़े पैमाने पर खेती करता है, तो मुनाफा कई गुना बढ़ सकता है। कम लागत, कम मेहनत और ऊंचे बाजार भाव के चलते खस की खेती आज के दौर में किसानों के लिए मुनाफे का बेहतरीन विकल्प बन रही है। सरकार और कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसान औषधीय फसलों की ओर रुझान बढ़ाते हैं, तो वे न सिर्फ आर्थिक रूप से सशक्त हो सकते हैं, बल्कि देश की औषधीय फसलों की मांग को भी पूरा कर सकते हैं। ऐसे में खस की खेती को एक नई हरित क्रांति की शुरुआत माना जा सकता है।
