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बायोफ्लॉक तकनीक: कम पानी और कम खर्च में मछली पालन

नई दिल्ली: भारत में मछली पालन के क्षेत्र में संभावनाएं तो बहुत हैं, लेकिन इसकी राह में कुछ प्रमुख चुनौतियां लंबे समय से बनी हुई हैं। पारंपरिक तरीके से मछली पालन करने में पानी की भारी खपत होती है और खर्च भी अधिक आता है। यही कारण है कि यह व्यवसाय बड़े पैमाने पर अब तक उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाया, जितनी उम्मीद थी। लेकिन अब एक नई वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल तकनीक सामने आई है, जो इन सभी समस्याओं का समाधान बन सकती है। इस तकनीक का नाम है – बायोफ्लॉक।

बायोफ्लॉक तकनीक एक बंद प्रणाली पर आधारित है, जिसमें टैंक के माध्यम से मछली पालन किया जाता है। पारंपरिक तालाब या पोखर की खुली प्रणाली के विपरीत, इसमें टैंक में सीमित स्थान में ही मछलियों को पाला जाता है। इस तकनीक की सबसे खास बात यह है कि मछलियों के मल और बचे हुए भोजन को फेंका नहीं जाता, बल्कि कुछ विशेष बैक्टीरिया की मदद से उन्हें प्रोटीन में बदला जाता है। यही प्रोटीन मछलियों के भोजन के रूप में दोबारा उपयोग होता है। इस प्रक्रिया से चारे की लागत काफी हद तक कम हो जाती है, साथ ही टैंक का पानी भी लंबे समय तक साफ बना रहता है।

बायोफ्लॉक तकनीक को अपनाने के लिए किसी बड़े भूखंड या तालाब की आवश्यकता नहीं होती। यह तकनीक छोटे किसानों और शहरी युवाओं के लिए भी एक शानदार अवसर बन सकती है, जो कम जगह में भी अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं। टैंक को घर की छत, आंगन या किसी छोटे प्लॉट में भी लगाया जा सकता है। इसमें पानी का उपयोग बहुत सीमित होता है और पानी को बार-बार बदलने की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे जल संरक्षण भी होता है।

इस तकनीक में चार प्रमुख चरण होते हैं। सबसे पहले टैंक तैयार किया जाता है जिसमें पानी भरकर मछलियों के बीज डाले जाते हैं। इसके बाद मछलियों को प्रारंभिक चारा दिया जाता है ताकि उनका विकास हो सके। फिर टैंक में विशेष बैक्टीरिया डाले जाते हैं, जो मछलियों के मल को प्रोटीन में बदलते हैं। अंततः यही प्रोटीन मछलियों का दोबारा चारा बन जाता है और पोषण चक्र चलता रहता है। बायोफ्लॉक विधि न केवल खर्च को घटाती है, बल्कि यह पर्यावरण के लिहाज से भी बेहद उपयोगी मानी जाती है। इससे पानी का प्रदूषण कम होता है, वेस्ट मैनेजमेंट बेहतर होता है और मछलियों की वृद्धि दर भी तेज होती है।

देश में कई राज्यों में किसान और उद्यमी इस तकनीक को अपनाकर लाभ कमा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्रों और मत्स्य पालन विभागों द्वारा भी समय-समय पर बायोफ्लॉक पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ऐसे में अगर आप भी कम लागत में मछली पालन शुरू करना चाहते हैं, तो बायोफ्लॉक तकनीक आपके लिए एक बेहतर विकल्प हो सकती है। यह न केवल आर्थिक रूप से फायदेमंद है, बल्कि जल संरक्षण और पर्यावरण की दृष्टि से भी एक उपयोगी कदम है।

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