नई दिल्ली: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सोमवार को कहा कि जुलाई के महीने में भारत के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार मध्य भारत, उत्तराखंड और हरियाणा में अत्यधिक वर्षा के चलते बाढ़ का खतरा बना हुआ है। इन राज्यों के प्रशासन और आम लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं देश के कुछ हिस्सों में मॉनसून का असर अब कहर बनकर टूट रहा है।
हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने तबाही मचाई है। राज्य के कुछ इलाकों में भूस्खलन के चलते इमारतें ढह गई हैं और सड़कें जाम हो गई हैं, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। राज्य में 20 जून को मॉनसून की शुरुआत के बाद से अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है। जून महीने में यहां सामान्य से 34 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है, जो 1901 के बाद 21वीं सबसे अधिक बारिश है।
ओडिशा के बालासोर और मयूरभंज जिलों में बाढ़ का संकट गहराता जा रहा है। राज्य की प्रमुख नदियों सुवर्णरेखा, बुधबलंग, जलाका और सोनो का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने रेड अलर्ट जारी कर दिया है और निचले इलाकों से लोगों को निकालने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। राहत और बचाव कार्य के लिए ODRAF की टीमों को सक्रिय किया गया है।
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर के हिस्सों में सोमवार सुबह गरज और तेज हवाओं के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई, जिससे तापमान में गिरावट आई और हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ। मौसम विभाग ने दिल्ली और आसपास के इलाकों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, हालांकि झज्जर, भिवानी और पानीपत जैसे कुछ क्षेत्रों को ग्रीन जोन में रखा गया है।
आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि इस वर्ष जुलाई में देशभर में औसतन 28 सेंटीमीटर बारिश होने की उम्मीद है, लेकिन मध्य भारत और आसपास के दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में भारी वर्षा की संभावना जताई जा रही है। उन्होंने बताया कि पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा, विदर्भ और तेलंगाना सहित गुजरात और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में तेज बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी राज्यों और दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों में बारिश सामान्य से कम हो सकती है, जबकि मध्य भारत और उत्तर-पश्चिम के कुछ इलाकों में अधिक वर्षा के आसार हैं। वहीं, कुछ क्षेत्रों में तापमान सामान्य से कम और कुछ में सामान्य से अधिक रहने की संभावना है।
उत्तराखंड में भी बारिश की वजह से स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। हालांकि, सोमवार को बारिश में थोड़ी कमी आने के बाद चारधाम यात्रा को फिर से शुरू कर दिया गया है, लेकिन प्रशासन ने तीर्थयात्रियों से सतर्कता बरतने की अपील की है। महापात्र ने कहा कि उत्तराखंड की नदियां दिल्ली समेत कई राज्यों की ओर बहती हैं, इसलिए इन क्षेत्रों में भी सावधानी बरतना जरूरी है।
देशभर में बारिश से एक ओर जहां फसल उत्पादन और जल संरक्षण के लिए राहत की उम्मीद है, वहीं कई राज्यों में इससे उत्पन्न बाढ़ और आपदा की स्थिति चुनौती बनती जा रही है। मौसम विभाग की भविष्यवाणी के अनुसार, आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। ऐसे में आम लोगों के साथ प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है कि वे समय रहते जरूरी कदम उठाएं।
