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देश में गेहूं उत्पादन 12 करोड़ टन पहुंचने की संभावना

Wheat production in the country

नई दिल्ली: इस वर्ष देश में गेहूं उत्पादन काफी अच्छी रहने की संभावना जताई जा रही है। अनुमान है कि देश में इस बार लगभग 12 करोड़ टन गेहूं का उत्पादन हो सकता है। यह मात्रा सरकार द्वारा तय किए गए 11 करोड़ 90 लाख टन के लक्ष्य से भी थोड़ी अधिक है। अच्छी बुवाई और अनुकूल मौसम को इस संभावित बढ़ोतरी का मुख्य कारण माना जा रहा है। पिछले वर्ष 2024-25 में देश में करीब 1,179.5 लाख टन गेहूं का उत्पादन हुआ था, जबकि इस बार उससे भी अधिक पैदावार होने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे किसानों और सरकार दोनों को फायदा मिलने की संभावना है।

ज्यादा बुवाई और अनुकूल मौसम से बढ़ी उम्मीद

इस वर्ष कई राज्यों में किसानों ने गेहूं की खेती का रकबा बढ़ाया है। खेतों में ज्यादा क्षेत्र में बुवाई होने से कुल उत्पादन बढ़ने की संभावना स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है। इसके साथ ही सर्दियों के दौरान मौसम भी गेहूं की फसल के लिए अनुकूल बना रहा। गेहूं की अच्छी वृद्धि के लिए ठंडा मौसम जरूरी होता है और इस बार देश के कई हिस्सों में ऐसा मौसम बना रहा, जिससे फसल की स्थिति बेहतर बनी हुई है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल और पारंपरिक सर्वेक्षण के आधार पर भी यह संकेत मिले हैं कि गेहूं का उत्पादन लगभग 12 करोड़ टन तक पहुंच सकता है। हाल ही में गेहूं उत्पादक राज्यों के साथ हुई बैठक में भी इसी तरह के अनुमान सामने आए हैं।

कुछ क्षेत्रों में गर्मी से असर की आशंका

हालांकि देश के अधिकांश हिस्सों में फसल की स्थिति अच्छी बताई जा रही है, लेकिन कुछ क्षेत्रों में देर से बोई गई गेहूं की फसल पर बढ़ती गर्मी का असर पड़ सकता है। यदि तापमान बहुत अधिक बढ़ता है तो गेहूं के दाने पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते, जिससे उत्पादन पर थोड़ा असर पड़ सकता है। इसके बावजूद कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि स्थिति अभी चिंताजनक नहीं है। कई बड़े गेहूं उत्पादक राज्यों में रात का तापमान अभी बहुत अधिक नहीं बढ़ा है, इसलिए फसल को बड़े नुकसान की आशंका कम मानी जा रही है।

रबी फसलों की नई रिपोर्ट जल्द

कृषि मंत्रालय जल्द ही रबी मौसम की फसलों की दूसरी अग्रिम रिपोर्ट जारी करने वाला है। इस रिपोर्ट में गेहूं के साथ-साथ सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों के उत्पादन का अनुमान भी बताया जाएगा। इससे पहले नवंबर में जारी पहली रिपोर्ट में कहा गया था कि खरीफ मौसम में देश में कुल 173.33 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है, जिसमें चावल, दालें, मक्का और मोटे अनाज शामिल हैं।

सरकार शुरू करेगी गेहूं की खरीद

सरकार हर वर्ष किसानों से गेहूं की खरीद करती है ताकि उसे सरकारी गोदामों में सुरक्षित रखा जा सके और जरूरत पड़ने पर लोगों को सस्ती दरों पर उपलब्ध कराया जा सके। यह खरीद एक अप्रैल से शुरू होने वाले रबी विपणन सत्र 2026-27 में शुरू होगी। सरकार ने इस वर्ष लगभग 30.3 मिलियन टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है। इसके अलावा रबी मौसम में उगाए गए चावल और मक्का की भी खरीद की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार खरीद प्रक्रिया को सुचारु बनाने के लिए पर्याप्त जूट बैग और उच्च घनत्व बहुलक थैले भी उपलब्ध कराए जाएंगे।

ज्यादा उत्पादन से बढ़ सकता है निर्यात

यदि इस वर्ष गेहूं का उत्पादन वास्तव में 12 करोड़ टन के आसपास पहुंचता है तो भारत के पास निर्यात बढ़ाने का अवसर भी रहेगा। हाल ही में सरकार ने लगभग चार वर्षों बाद पहली बार गेहूं के निर्यात की अनुमति दी है। इसके तहत करीब 2.5 मिलियन टन गेहूं विदेश भेजने की मंजूरी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों को बेहतर कीमत मिल सकती है और देश की अर्थव्यवस्था को भी लाभ हो सकता है।

दुनिया में घट सकता है गेहूं उत्पादन

दूसरी ओर दुनिया के कई देशों में गेहूं उत्पादन कम होने की संभावना जताई जा रही है। खाद्य और कृषि संगठन की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2026 में वैश्विक स्तर पर गेहूं उत्पादन लगभग तीन प्रतिशत घटकर करीब 810 मिलियन टन रह सकता है। इसका कारण कई क्षेत्रों में खेती का क्षेत्र घटने और पैदावार कम रहने को बताया गया है।

मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग के अनुसार देश के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से अधिक दर्ज किया जा रहा है। राजस्थान, गुजरात और हरियाणा में पिछले दिनों तापमान 38 से 41 डिग्री तक पहुंच गया। महाराष्ट्र के अकोला में सबसे अधिक 40.9 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। हालांकि गेहूं उत्पादक प्रमुख राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश में रात का तापमान अभी 14 से 18 डिग्री के बीच बना हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार फिलहाल यह स्थिति फसल के लिए ज्यादा नुकसानदायक नहीं मानी जा रही है।

कुल मिलाकर देखा जाए तो इस वर्ष भारत में गेहूं की फसल काफी अच्छी रहने की संभावना है। यदि मौसम में अचानक बड़ा बदलाव नहीं होता है तो देश में रिकॉर्ड स्तर का गेहूं उत्पादन हो सकता है, जिससे किसानों, सरकार और आम उपभोक्ताओं सभी को फायदा मिल सकता है।

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