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पंजाब में गेहूं की खरीद से पहले आढ़तियों की हड़ताल, किसान परेशान

Wheat procurement in Punjab

चंडीगढ़: 1 अप्रैल से पंजाब में गेहूं की खरीद शुरू होने जा रही है, लेकिन इससे ठीक पहले आढ़तियों ने पूर्ण हड़ताल पर जाने का ऐलान कर दिया है। बुधवार से राज्यभर में आढ़ती काम बंद रखेंगे, जिससे गेहूं की खरीद, सफाई और भराई की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

हड़ताल के बीच किसानों को राहत देने का प्रयास

आढ़तियों ने किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए सरसों और जौ की खरीद जारी रखने का फैसला लिया है। इन फसलों को अधिक समय तक मंडियों में रखने से खराब होने का खतरा रहता है, इसलिए यह कदम किसानों के नुकसान को कम करने के लिए उठाया गया है।

कमीशन बढ़ाने की प्रमुख मांग

आढ़ती संगठनों का कहना है कि कुछ वर्षों पहले उनका कमीशन घटाकर बहुत कम कर दिया गया था। हाल ही में इसमें मामूली बढ़ोतरी की गई, लेकिन इसे अपर्याप्त बताया जा रहा है। उनकी मांग है कि हरियाणा की तर्ज पर कमीशन बढ़ाकर 55 रुपये प्रति कुंतल किया जाए। साथ ही श्रमिकों से जुड़े नियमों से राहत देने और जारी नोटिस वापस लेने की भी मांग की जा रही है।

मंडियों में अव्यवस्था का खतरा

किसानों ने चिंता जताई है कि यदि हड़ताल लंबे समय तक जारी रही तो गेहूं की फसल को नुकसान हो सकता है। मंडियों में भीड़ बढ़ने और अव्यवस्था फैलने की आशंका है, जिससे किसानों को फसल बेचने में दिक्कतें आ सकती हैं।

एशिया की सबसे बड़ी मंडी पर असर

खन्ना की दाना मंडी, जिसे एशिया की सबसे बड़ी मंडी माना जाता है, इस हड़ताल से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती है। यहां हजारों किसान और सैकड़ों आढ़ती जुड़े हुए हैं, ऐसे में काम बंद होने से बड़े स्तर पर असर पड़ सकता है।

सरकार की तैयारियां और आश्वासन

राज्य सरकार का कहना है कि खरीद के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली गई हैं। इस बार बड़ी संख्या में किसान मंडियों में आएंगे और सरकार ने अधिक मात्रा में गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है। साथ ही किसानों को 24 घंटे के भीतर भुगतान करने का भी आश्वासन दिया गया है। पंजाब में गेहूं खरीद सीजन के बीच यह हड़ताल एक बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और आढ़तियों के बीच बातचीत से जल्द समाधान निकलता है या नहीं, ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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