भोपाल: ईरान युद्ध का असर अब मध्य प्रदेश के गेहूं उपार्जन पर भी दिखाई देने लगा है। राज्य सरकार ने एक बार फिर गेहूं खरीद की तारीख बढ़ा दी है, जिससे किसानों की परेशानी बढ़ गई है। अब समर्थन मूल्य पर खरीद 10 अप्रैल से शुरू होने की नई तारीख तय की गई है।
बारदाने की कमी बनी बड़ी वजह
सरकारी सूत्रों के अनुसार गेहूं के भंडारण के लिए आवश्यक बारदाने की कमी इस देरी की मुख्य वजह है। ईरान युद्ध के कारण पॉलीप्रोपाइलीन और उच्च घनत्व वाले प्लास्टिक बैग के उत्पादन पर असर पड़ा है, जिससे आपूर्ति बाधित हुई है। राज्य में गेहूं खरीद के लिए लगभग 15.60 करोड़ बारदाने की जरूरत है, जबकि अभी केवल 5.50 करोड़ ही उपलब्ध हैं।
किसानों को हो रही भारी परेशानी
सीहोर जिले के किसान इस देरी से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। यहां के शरबती गेहूं की पहचान देशभर में है, लेकिन खरीद में देरी के कारण किसानों को अपनी फसल खुले में रखने को मजबूर होना पड़ रहा है। कई किसानों का कहना है कि उन्होंने तय तारीख के अनुसार अपनी फसल मंडियों में पहुंचा दी थी, लेकिन बार-बार तारीख बढ़ने से उन्हें आर्थिक और भंडारण दोनों तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
मौसम बदलाव से बढ़ा खतरा
कटाई के बाद गेहूं लंबे समय तक खुले में पड़ा रहने से मौसम का खतरा भी बढ़ गया है। किसानों को आशंका है कि यदि बारिश या आंधी आती है तो उनकी फसल को नुकसान हो सकता है। इसके साथ ही अन्य फसलों के भंडारण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
सरकार ने बुलाई बैठक
स्थिति को देखते हुए सरकार ने वेयरहाउस संचालकों के साथ बैठक की है, जिसमें बारदाने की कमी की जानकारी साझा की गई। अधिकारियों का कहना है कि बारदाने की आपूर्ति के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
बड़े लक्ष्य के बीच चुनौती
इस वर्ष मध्य प्रदेश में करीब 19.04 लाख किसानों ने गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण कराया है और सरकार ने 78 लाख मीट्रिक टन से अधिक खरीद का लक्ष्य रखा है। किसानों को 2585 रुपये प्रति कुंतल समर्थन मूल्य के साथ अतिरिक्त 40 रुपये प्रति कुंतल प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। हालांकि बड़े लक्ष्य के बीच बारदाने की कमी और खरीद में देरी ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार कितनी जल्दी इस समस्या का समाधान कर पाती है और किसानों को राहत मिलती है।
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