चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए राज्य में अनाज भंडारण क्षमता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए हैं कि प्रदेश में 20 लाख मीट्रिक टन क्षमता के नए आधुनिक गोदाम बनाए जाएं, ताकि किसानों की फसल सुरक्षित रह सके और खराब होने से बचाई जा सके। यह निर्देश हरियाणा सिविल सचिवालय में आयोजित खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए। बैठक में आगामी वर्षों की कार्ययोजना और दीर्घकालिक विकास लक्ष्य पर विस्तार से चर्चा की गई।
भंडारण की कमी से हर साल नुकसान
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि पर्याप्त भंडारण व्यवस्था न होने के कारण हर साल लगभग 4 से 5 प्रतिशत अनाज खराब हो जाता है। इस नुकसान को रोकने के लिए सुरक्षित और आधुनिक गोदामों का निर्माण बेहद जरूरी है। वर्तमान में राज्य में गेहूं, चावल, फल-सब्जियों और दुग्ध उत्पादों का उत्पादन बड़े स्तर पर हो रहा है, जिससे भंडारण की मांग लगातार बढ़ रही है। देश की खाद्य सुरक्षा में हरियाणा का योगदान भी काफी महत्वपूर्ण है।
भंडारण क्षमता दोगुनी करने की तैयारी
इस समय प्रदेश में लगभग 66 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता उपलब्ध है, जिसे बढ़ाकर 130 लाख मीट्रिक टन तक करने की योजना बनाई गई है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि इस लक्ष्य को सार्वजनिक और निजी भागीदारी के माध्यम से जल्द पूरा किया जाए। साथ ही फल, सब्जियों और बागवानी फसलों के लिए भी अलग से भंडारण व्यवस्था विकसित करने पर जोर दिया गया।
सौर ऊर्जा से चलेंगे आधुनिक गोदाम
सरकार गोदामों को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी काम कर रही है। इसके तहत सभी नए और पुराने गोदामों की छतों पर सौर ऊर्जा उपकरण लगाए जाएंगे और उन्हें बिजली तंत्र से जोड़ा जाएगा, जिससे अतिरिक्त ऊर्जा का उत्पादन भी हो सके।
आधुनिक तकनीक से बढ़ेगी दक्षता
मंडियों और गोदामों में पारंपरिक तरीके से बोरी उठाने की व्यवस्था को बदलकर आधुनिक तकनीक अपनाने की योजना है। इसके तहत कन्वेयर बेल्ट और अन्य मशीनों के उपयोग के लिए प्रारंभिक परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिससे कार्य तेजी और सुरक्षा के साथ हो सके।
हजारों करोड़ के नुकसान से मिलेगा बचाव
अधिकारियों के अनुसार, इन योजनाओं के लागू होने से अगले पांच वर्षों में करीब 3000 से 5000 करोड़ रुपये तक के नुकसान को रोका जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि उसके सुरक्षित भंडारण और बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करना है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिल सके।
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