नई दिल्ली: देश में चल रहे ‘खेत बचाओ अभियान’ के बीच खादों के उपयोग को लेकर एक सकारात्मक संकेत सामने आया है। केंद्र सरकार के अनुसार खरीफ मौसम के लिए जरूरी पांच प्रमुख पोषक तत्वों की मांग में गिरावट दर्ज की गई है। यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में खादों की कीमतें काफी बढ़ चुकी हैं और भारत बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। ऐसे में मांग में कमी को एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में महीने भर चलने वाले ‘खेत बचाओ अभियान’ की शुरुआत की है। इस अभियान का उद्देश्य रासायनिक खादों के इस्तेमाल को कम करना और मिट्टी की सेहत को सुधारना है। इसी दिशा में खादों की घटती मांग को सकारात्मक बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।
बारिश और रोपाई का सीधा असर मांग पर
सरकार ने खादों की मांग और आपूर्ति की स्थिति पर जानकारी देते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में कुल सब्सिडी का करीब बीस प्रतिशत हिस्सा ही खर्च हुआ है। उर्वरक विभाग की अतिरिक्त सचिव अपर्णा एस शर्मा के अनुसार, जरूरत पड़ने पर वित्त मंत्रालय से अतिरिक्त राशि की मांग की जाएगी।
उत्तर भारत के कई राज्यों में अभी धान की रोपाई शुरू नहीं हुई है, जिससे खादों की मांग धीमी बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दस जून के बाद रोपाई में तेजी आएगी, जिससे यूरिया की मांग भी बढ़ेगी। कुछ राज्य सरकारों ने किसानों को सलाह दी है कि वे मानसून की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही खेती शुरू करें। मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया गया है। ऐसे में फसलों की बुवाई कम होने की संभावना है, जिसका सीधा असर खादों की मांग पर पड़ेगा।
सरकार के लिए राहत, लेकिन उत्पादन पर असर संभव
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में खाद सब्सिडी के लिए एक लाख सत्तर हजार करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। इसमें यूरिया और अन्य पोषक तत्वों के लिए अलग-अलग हिस्से तय किए गए हैं। पिछले वित्त वर्ष में यह राशि और अधिक रही थी, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के बढ़ने के कारण प्रभावित हुई। खादों की मांग में गिरावट सरकार के लिए राहत की खबर मानी जा रही है क्योंकि इससे सब्सिडी का बोझ कुछ हद तक कम हो सकता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर पोषक तत्वों का इस्तेमाल कम होता है तो इसका असर फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।
बढ़ सकती है सब्सिडी का बोझ
जानकारों के अनुसार अभी मांग में कमी का मुख्य कारण मानसून की देरी है। जैसे ही बारिश शुरू होगी, खादों की मांग अचानक बढ़ सकती है और कई जगहों पर कमी की स्थिति भी बन सकती है। इस बार प्री-मानसून बारिश भी कम रही है, जिससे खेतों में नमी की कमी बनी हुई है। यदि पश्चिम एशिया में तनाव जारी रहता है और आयात महंगा होता है, तो देश में खाद सब्सिडी का कुल बोझ तीन लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। इससे पहले इसका अनुमान दो लाख करोड़ रुपये से कम था, लेकिन वैश्विक परिस्थितियों ने इसे काफी बढ़ा दिया है।
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