Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

अब उर्वरक की खपत पर GPS निगरानी और POS मशीनें अनिवार्य

अब उर्वरक की खपत पर GPS निगरानी

नई दिल्ली: देश में बढ़ते उर्वरक संकट को देखते हुए केंद्र सरकार ने आगामी रबी सीजन 2025 के लिए बड़ा फैसला लिया है। कृषि मंत्रालय ने सभी राज्यों से कहा है कि बहुत ज्यादा सब्सिडी वाले उर्वरकों का दुरुपयोग रोकने के लिए तीन स्तरीय समितियां बनाई जाएं और किसानों के लिए उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। इसके लिए सरकार ने अपने स्तर पर कई प्रयास शुरू कर दिये हैं। बताया जा रहा है कि उर्वरक की खपत पर GPS निगरानी रखी जाएगी।

वाहनों और दुकानों पर होगी सख्त, GPS निगरानी रखी जाएगी

केंद्र ने राज्यों को निर्देश दिया है कि किसानों को उर्वरक बेचने वाली कंपनियों के 3 लाख खुदरा दुकानों पर एडवांस इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट-ऑफ-सेल (POS) मशीनें लगाई जाएं। इसके साथ ही बंदरगाहों और रेलवे से कंपनियों तक उर्वरक ढोने वाले सभी वाहनों पर GPS ट्रैकिंग जरूरी होगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सब्सिडी वाले उर्वरक जैसे यूरिया, डीएपी, एनपीके और पोटाश किसी भी हाल में औद्योगिक कार्यों में इस्तेमाल न हों।

उर्वरकों की खपत में इजाफा

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल से चालू खरीफ सीजन में यूरिया, एनपीके और एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) की खपत 2024 के खरीफ सीजन की तुलना में क्रमशः 0.8 मिलियन टन, 1 मिलियन टन और 0.5 मिलियन टन बढ़ गई है।

आयात पर निर्भरता बड़ी चुनौती

भारत में उर्वरक उत्पादन के लिए बड़ी मात्रा में कच्चा माल आयात किया जाता है।

गौरतलब है कि साल 2012 से अब तक यूरिया की खुदरा कीमत ₹242 प्रति 45 किलो बैग तय है, जबकि इसकी असली उत्पादन लागत ₹2,600 रुपये प्रति बैग से ज्यादा है।

कृषि मंत्री का बयान

रबी रणनीति बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, “अच्छी बारिश और बदलते हालात की वजह से बुआई का क्षेत्र बढ़ा है, जिससे उर्वरकों की मांग और बढ़ेगी। केंद्र और राज्य मिलकर किसानों को उर्वरकों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे।”

क्यों जरूरी है सख्ती?

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि सब्सिडी वाले उर्वरकों का गलत इस्तेमाल सरकार के खजाने पर भारी बोझ डालता है। अगर इनका औद्योगिक इस्तेमाल रोका जाए और केवल खेती में ही सही ढंग से इस्तेमाल हो, तो न केवल किसानों को फायदा होगा बल्कि देश की आर्थिक और खाद्य सुरक्षा भी मजबूत होगी। साथ ही, उर्वरक की खपत पर GPS निगरानी से किसानों के लिए उर्वरकों की किल्लत नहीं होगी।

ये भी पढ़ें: नेशनल टेस्ट हाउस लैब में होगी खाद की जांच, किसानों को मिलेंगे शुद्ध उर्वरक

Exit mobile version