सरकारी योजनाएँ

जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की दोहरी रणनीति, किसानों को मिल रही आर्थिक और तकनीकी मदद

नई दिल्ली: देशभर में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की दो प्रमुख योजनाएं – ‘परंपरागत कृषि विकास योजना’ (PKVY) और ‘पूर्वोत्तर क्षेत्र में जैविक मूल्य श्रृंखला विकास मिशन’ (MOVCDNER) तेजी से किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। इन योजनाओं के तहत किसानों को न केवल जैविक खेती के लिए आर्थिक सहायता दी जा रही है, बल्कि उनकी उपज के प्रोसेसिंग, प्रमाणीकरण और विपणन में भी मदद की जा रही है। मंगलवार को कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि देश के सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, सिवाय पूर्वोत्तर के, PKVY योजना के दायरे में आते हैं, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों के लिए MOVCDNER योजना चलाई जा रही है। इन दोनों योजनाओं का उद्देश्य किसानों को टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल खेती की ओर प्रोत्साहित करना है।

इन योजनाओं के तहत खास तौर पर छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाती है और उन्हें जैविक खेती के समूहों (क्लस्टर) के रूप में संगठित किया जाता है। ये योजनाएं पूरी तरह से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से लागू की जा रही हैं, ताकि स्थानीय स्तर पर किसानों को प्रभावी सहयोग मिल सके। PKVY योजना के अंतर्गत किसानों को तीन साल की अवधि में प्रति हेक्टेयर 31,500 रुपये तक की सहायता प्रदान की जाती है। इसमें जैविक खाद जैसे इनपुट्स के लिए सीधे किसानों के खाते में 15,000 रुपये, मार्केटिंग व ब्रांडिंग के लिए 4,500 रुपये, प्रमाणीकरण और अवशेष जांच के लिए 3,000 रुपये और प्रशिक्षण व जागरूकता के लिए 9,000 रुपये की राशि दी जाती है।

वहीं MOVCDNER योजना के तहत पूर्वोत्तर राज्यों के किसानों को प्रति हेक्टेयर 46,500 रुपये तक की सहायता दी जाती है। इसमें से 32,500 रुपये जैविक इनपुट्स के लिए, 4,000 रुपये विपणन के लिए और 10,000 रुपये प्रशिक्षण, प्रमाणन और प्रबंधन हेतु होते हैं। दोनों योजनाओं के तहत एक किसान अधिकतम दो हेक्टेयर भूमि तक के लिए लाभ प्राप्त कर सकता है। सरकार सिर्फ उत्पादन तक ही नहीं, बल्कि किसानों को उनके उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी सक्रिय है। इसके लिए राज्य सरकारें समय-समय पर अन्य राज्यों में जैविक सेमिनार, वर्कशॉप, प्रदर्शनियां, और क्रेता-विक्रेता बैठकें आयोजित करती हैं। साथ ही, किसानों के संगठनों को GeM पोर्टल और ONDC जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा जा रहा है, ताकि वे ऑनलाइन मार्केटिंग के माध्यम से भी अपने उत्पाद बेच सकें।

इसके साथ ही किसानों को प्राकृतिक आपदाओं और फसल नुकसान से बचाने के लिए केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) शुरू की हैं। वर्ष 2016 से लागू ये योजनाएं देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उपलब्ध हैं और राज्य सरकारों एवं किसानों की स्वैच्छिक भागीदारी पर आधारित हैं। PMFBY उन फसलों को कवर करती है, जिनके लिए ऐतिहासिक डेटा और फसल काटने के आंकड़े उपलब्ध हों, जबकि RWBCIS मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर फसल नुकसान का आकलन करती है। इन प्रयासों के माध्यम से केंद्र सरकार किसानों को केवल जैविक खेती के लिए नहीं, बल्कि पूरी कृषि प्रणाली को अधिक स्थायी, लाभकारी और बाजार से जुड़ा बनाने की दिशा में सशक्त करने का प्रयास कर रही है।

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