नई दिल्ली: देश में मवेशियों के लिए खतरा बन चुकी लंपी स्किन डिज़ीज़ (Lumpy Skin Disease) तेजी से फैल रही है। बिहार और उत्तर प्रदेश में हजारों मामलों के बाद अब राजस्थान के जोधपुर और हरियाणा के चरखी-दादरी में भी यह बीमारी देखने को मिल रही है। नोएडा के आसपास के इलाकों में भी लंपी संक्रमण के केस रिपोर्ट किए गए हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक यह बीमारी मुख्य रूप से गायों और भैंसों में फैलती है और इसकी असल वजह कैप्री पॉक्स वायरस (Capripox Virus) है। यह एक संक्रामक और जानलेवा बीमारी है, जो पशुओं की त्वचा पर गांठ और घाव बना देती है।
लंपी वायरस कैसे फैलता है?
पशु चिकित्सकों के अनुसार, लंपी वायरस का प्रसार मच्छर, मक्खी, जूं और चींचड़ों के जरिए तेजी से होता है।
- यह बीमारी पीड़ित पशु की लार, मवाद, जख्म, संक्रमित चारा और पानी से भी फैल सकती है।
- पशुओं के शेड में गंदगी, पानी और मल-मूत्र जमा होने से यह संक्रमण और तेजी से फैलता है।
- संक्रमित पशु के संपर्क में आने वाले इंसानों के कारण भी यह बीमारी अन्य पशुओं तक पहुंच सकती है।
लंपी बीमारी से बचाव के उपाय
पशुपालकों को सलाह दी गई है कि जैसे ही आसपास के क्षेत्र में लंपी के केस मिलें, तुरंत सतर्कता बरतें।
- एनिमल शेड में मच्छर, मक्खी, जूं और चींचड़े को कंट्रोल करें।
- पशुओं पर नियमित रूप से परजीवी नाशक दवाई का स्प्रे करें।
- एनिमल शेड और उसके आसपास पूरी साफ-सफाई रखें।
- बाड़े में पानी और गंदगी न जमा होने दें।
- बाहरी लोगों और वाहनों की एनिमल शेड में आवाजाही रोकें।
- संक्रमित पशु को तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग रखें।
- संक्रमित पशुओं को चराई या खुले में न छोड़ें।
- संक्रमित क्षेत्र में पशुओं का आवागमन प्रतिबंधित करें।
- एनिमल शेड के प्रवेश द्वार पर चूने की दो फुट चौड़ी पट्टी बनाएं।
- संक्रमित परिसर और वाहन को 2% सोडियम हाइपोक्लोराइट से सेनेटाइज करें।
- झोलाछाप डॉक्टरों से बचें और केवल प्रमाणित पशु चिकित्सक से ही इलाज कराएं।
- संक्रमित पशु का दूध इस्तेमाल करने से पहले कम से कम दो मिनट तक उबालें।
- पीड़ित पशु को संतुलित आहार, हरा चारा, दलिया, गुड़ और बांटा खिलाएं।
क्यों है यह बीमारी खतरनाक?
लंपी स्किन डिज़ीज़ से पीड़ित पशुओं की दूध उत्पादन क्षमता घट जाती है, उनका वजन कम हो जाता है और गंभीर स्थिति में मौत भी हो सकती है। यही वजह है कि यह बीमारी पशुपालकों और डेयरी उद्योग के लिए बड़ी चिंता का विषय बन चुकी है।
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