नई दिल्ली: भारत में चीनी उत्पादन को लेकर उद्योग जगत के अनुमान में बड़ा बदलाव सामने आया है। अखिल भारतीय चीनी व्यापार संघ ने वर्ष 2025-26 के चीनी सत्र के लिए उत्पादन का अनुमान घटाकर 283 लाख टन कर दिया है। इससे पहले जनवरी के अंत में जारी पहले अनुमान में उत्पादन 296 लाख टन बताया गया था। लगभग एक महीने के भीतर किए गए इस संशोधन ने वैश्विक बाजार में बनी उस धारणा को झटका दिया है, जिसमें भारत से रिकॉर्ड स्तर पर चीनी उत्पादन की उम्मीद जताई जा रही थी।
इथेनॉल उत्पादन के लिए डायवर्ट होगी बड़ी मात्रा
संघ के अनुसार देश में कुल चीनी उत्पादन लगभग 315 लाख टन रहने का अनुमान है। हालांकि इसमें से करीब 32 लाख टन गन्ना इथेनॉल उत्पादन के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। इसी कारण बाजार में वास्तविक रूप से उपलब्ध चीनी की मात्रा घटकर लगभग 283 लाख टन रहने की संभावना जताई गई है।
कई राज्यों में मौसम से प्रभावित हुई गन्ने की फसल
संघ की फसल समिति के अनुसार इस सत्र में कई प्रमुख गन्ना उत्पादक क्षेत्रों में असामान्य मौसम का असर देखने को मिला है। महाराष्ट्र और कर्नाटक में लगातार वर्षा और लंबे समय तक बादल छाए रहने से गन्ने की बढ़वार और पकने की प्रक्रिया प्रभावित हुई है। विशेष रूप से महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र में अक्टूबर के दौरान हुई भारी वर्षा से खेतों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। इसके कारण खेत प्रबंधन और गन्ने की कटाई से जुड़े कार्यों में भी बाधा आई।
रैटून फसल में समय से पहले फूल आने की समस्या
मौसम की अनिश्चितता का असर गन्ने की उत्पादकता पर भी पड़ा है। कई क्षेत्रों में रैटून फसल में समय से पहले फूल आने की समस्या सामने आई, जिससे उत्पादन क्षमता कम हो गई। राज्यवार आंकड़ों के अनुसार देश के सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र का उत्पादन अब 99.7 लाख टन रहने का अनुमान है, जबकि पहले इसे 108.1 लाख टन आंका गया था। हालांकि यह पिछले सत्र के 81 लाख टन उत्पादन से अभी भी अधिक है।
उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में भी उत्पादन घटा
उत्तर प्रदेश में भी उत्पादन का अनुमान घटाकर 91 लाख टन कर दिया गया है, जो पहले 94.1 लाख टन बताया गया था। यह आंकड़ा पिछले वर्ष के 93 लाख टन उत्पादन से भी थोड़ा कम है। वहीं कर्नाटक में उत्पादन अनुमान मामूली गिरावट के साथ 48 लाख टन रहने की संभावना जताई गई है, जबकि पहले यह 49.1 लाख टन आंका गया था। हालांकि यह पिछले वर्ष के 43 लाख टन उत्पादन से बेहतर माना जा रहा है।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक मिलकर देश के कुल चीनी उत्पादन का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा देते हैं। इसी बीच भारतीय चीनी मिल संघ ने भी वर्ष 2025-26 के लिए अपना उत्पादन अनुमान घटाकर 292.9 लाख टन कर दिया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस बार चीनी उत्पादन पहले की अपेक्षा कम रह सकता है।
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