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जई की नई किस्म एचएफओ 906 से बढ़ेगा हरा चारा उत्पादन

New variety of oats

हिसार: पशुपालन में हरे चारे की अहम भूमिका होती है और इसकी पर्याप्त उपलब्धता पशुपालकों की आय बढ़ाने में बड़ा योगदान देती है। वर्तमान समय में देश में हरे और सूखे चारे की कमी एक गंभीर समस्या बनती जा रही है। बीते कई वर्षों से चारे के घटते उत्पादन को लेकर लगातार चिंता जताई जा रही है। हालांकि इस कमी को दूर करने के लिए कई प्रयास शुरू हुए हैं, लेकिन अभी भी ये पर्याप्त साबित नहीं हो पाए हैं। हरे चारे से बनने वाले साइलेज के प्रति भी पशुपालकों में जागरूकता अपेक्षाकृत कम देखी जा रही है। इसी बीच पशुपालकों के लिए हरे चारे से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है। चारा वैज्ञानिकों ने जई की नई किस्म विकसित की है, जो पशुपालकों की चारे की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती है।

वैज्ञानिकों का दावा है कि यह चारा पशुओं के लिए बेहद लाभकारी है। इसे खाने से मांस उत्पादन के लिए पाले जाने वाले पशुओं की शारीरिक वृद्धि बेहतर होगी और साथ ही दुग्ध उत्पादन में भी बढ़ोतरी देखने को मिलेगी।

नई किस्म में अधिक प्रोटीन और बेहतर पाचन क्षमता

चारा विशेषज्ञों के अनुसार जई की नई किस्म एचएफओ 906 में प्रोटीन की मात्रा अधिक है और इसकी पाचन क्षमता भी बेहतर है। इसी वजह से यह पशुओं के लिए एक उत्तम हरा चारा माना जा रहा है। देश में वर्तमान समय में लगभग 11.24 प्रतिशत हरे चारे और 23.4 प्रतिशत सूखे चारे की कमी बताई जाती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए इस नई किस्म को विकसित किया गया है, क्योंकि चारे की कमी के कारण पशुओं की उत्पादकता पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जई की अधिक उत्पादन देने वाली और गुणवत्तापूर्ण किस्मों के विकसित होने से पशुपालकों को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे पशुओं की उत्पादकता में भी वृद्धि होगी। एचएफओ 906 किस्म राष्ट्रीय स्तर की प्रचलित जांच किस्मों कैंट और ओएस 6 की तुलना में लगभग 14 प्रतिशत तक अधिक हरे चारे का उत्पादन देती है। यह जई की एक कटाई वाली किस्म है, जिससे किसानों को प्रबंधन में भी आसानी रहती है।

चार राज्यों के पशुपालकों को मिलेगा लाभ

विशेषज्ञों के अनुसार जई की एचएफओ 906 किस्म को देश के उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए विशेष रूप से अनुमोदित किया गया है। इसमें हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे राज्य शामिल हैं। इन राज्यों में समय पर बुवाई करने पर इस किस्म से बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना है। वैज्ञानिकों का कहना है कि हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई फसलों की किस्मों का लाभ केवल हरियाणा तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के अन्य राज्यों के किसान भी इनसे फायदा उठा रहे हैं। चारे की उन्नत किस्मों की मांग अन्य प्रदेशों में भी लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि हरियाणा और विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है। इस सफलता के लिए चारा अनुभाग के वैज्ञानिकों को बधाई दी गई है और भविष्य में भी ऐसे ही नवाचार जारी रखने का आह्वान किया गया है, ताकि पशुपालकों को बेहतर चारा उपलब्ध हो सके और पशुधन उत्पादन में वृद्धि हो।

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