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राजस्थान में खरीफ सीजन 2025 की बुआई योजना घोषित

Sowing plan for Kharif season 2025 announced in Rajasthan

जयपुर: राजस्थान सरकार के कृषि विभाग ने खरीफ सीजन 2025 के लिए फसलों की बुवाई का लक्ष्य जारी कर दिया है। इस साल की योजना में कुछ खास बदलाव किए गए हैं, जिनमें सबसे अहम है ग्वार जैसी परंपरागत नकदी फसल के बुवाई लक्ष्य में कटौती और दलहनी व मोटे अनाजों को बढ़ावा देना। राज्य सरकार के इस फैसले के पीछे बाजार की मांग, पिछले साल की कीमतें और केंद्र सरकार की ओर से मोटे अनाजों को बढ़ावा देने की नीति बड़ी वजह मानी जा रही है। राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि का बड़ा योगदान है। कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र राज्य की जीडीपी में करीब 27 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं। खरीफ फसलें राज्य के कृषि परिदृश्य की रीढ़ मानी जाती हैं, ऐसे में इस सीजन की बुआई योजना किसानों की रणनीति को तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

मूंग का रकबा बढ़ाने का लक्ष्य

मूंग जैसी प्रमुख दलहनी फसल के लिए बुवाई का लक्ष्य बढ़ाया गया है। पिछले साल यह फसल 2.36 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में बोई गई थी, जबकि इस साल इसे 2.5 मिलियन हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। जयपुर के मूंग व्यापारी निर्मल जैन के अनुसार, पिछले साल मूंग की कीमतें किसानों के पक्ष में रहीं, जिससे इस साल किसान इस फसल को लेकर ज्यादा उत्साहित हैं। बाजरा और मक्का जैसी मोटे अनाजों की फसलों का लक्ष्य इस साल पिछले साल के बराबर रखा गया है। 2024 में जहां राज्य में 43 लाख हेक्टेयर में बाजरा बोया गया था, वहीं इस साल भी यह लक्ष्य जस का तस है। मक्का की बुआई का लक्ष्य भी 970,000 हेक्टेयर पर बरकरार है। ज्वार की बुआई का लक्ष्य इस साल दोगुना कर 620,000 हेक्टेयर कर दिया गया है, जबकि पिछले साल यह 341,000 हेक्टेयर था।

गवार की बुआई में कमी

इस साल ग्वार की बुआई का लक्ष्य घटाकर 2.5 मिलियन हेक्टेयर कर दिया गया है, जो पिछले साल 2.9 मिलियन हेक्टेयर था। राजस्थान देश में ग्वार उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत योगदान देता है, लेकिन इस साल किसान इसका रुख कम करते दिख रहे हैं। बाड़मेर के एक ग्वार व्यापारी के अनुसार, 2024-25 में ग्वार के भाव में कोई उल्लेखनीय बढ़ोतरी नहीं हुई है। निर्यात में गिरावट और स्टॉक की अधिकता के कारण बाजार में कीमतें स्थिर बनी रहीं। ऐसे में किसानों ने ग्वार की जगह मूंग और बाजरा की ओर रुख करना शुरू किया है, क्योंकि इनकी कीमतें बेहतर रही हैं और कटाई के बाद बची फसल को चारे के रूप में भी बेचा जा सकता है।

तिलहन फसलों पर मिला-जुला रुख

तिलहन फसलों में भी इस साल मिला-जुला रुख देखा गया है। सोयाबीन के बुवाई लक्ष्य को बढ़ाकर 1.1 मिलियन हेक्टेयर किया गया है, जबकि मूंगफली का लक्ष्य घटाकर 950,000 हेक्टेयर कर दिया गया है, जो पिछले साल 1.04 मिलियन हेक्टेयर था। मॉनसून के जल्द पहुंचने के कारण इस बार बुआई की रफ्तार भी तेज रही है। 20 जून तक 246,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरा बोया जा चुका है, जो इस मौसम की सकारात्मक शुरुआत को दर्शाता है। राजस्थान की खरीफ रणनीति इस बार स्पष्ट रूप से बाजार और जलवायु के अनुकूल फसलों को बढ़ावा देने की दिशा में है। ग्वार जैसी परंपरागत नकदी फसल की बजाय अब किसान उत्पादन, मूल्य और उपयोगिता के लिहाज से अधिक लाभकारी विकल्पों की ओर बढ़ रहे हैं। सरकार की यह नई दिशा राज्य की कृषि को स्थायित्व और विविधता देने में सहायक हो सकती है।

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