कृषि समाचार

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन की धीमी रफ्तार पर राज्यों से मांगा गया जवाब

Slow pace of Digital Agriculture Mission

नई दिल्ली: कृषि क्षेत्र को डिजिटल बनाने के लिए शुरू किए गए डिजिटल कृषि मिशन की धीमी प्रगति को लेकर केंद्र सरकार ने कई राज्यों से जवाब मांगा है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान राज्यों के अधिकारियों के साथ मिशन की प्रगति की समीक्षा की। माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी जल्द ही इस मिशन की समीक्षा कर सकते हैं।

61 फीसदी बुवाई क्षेत्र ही किसान पहचान पत्र से जुड़ा

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 15 अगस्त तक देश के कुल बुवाई क्षेत्र का केवल 61 प्रतिशत हिस्सा ही किसान पहचान पत्र से जोड़ा जा सका है। बिहार, झारखंड, पंजाब, हरियाणा, असम, केरल, ओडिशा और पश्चिम बंगाल समेत 17 राज्यों में एक-तिहाई से भी कम कृषि क्षेत्र किसान पहचान पत्र से जुड़ पाया है। बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि जिन राज्यों ने गंभीरता से काम किया है, वहां बेहतर परिणाम सामने आए हैं, जबकि कुछ राज्यों में अपेक्षित प्रयास नहीं हुए हैं। उन्होंने राज्यों से जल्द से जल्द निर्धारित लक्ष्य पूरा करने को कहा।

किसान पहचान पत्र बनेगा डिजिटल कृषि व्यवस्था का आधार

किसान पहचान पत्र को कृषि क्षेत्र की डिजिटल व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। इसके माध्यम से किसानों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा और सरकारी योजनाओं, अनुदान, फसल संबंधी आंकड़ों तथा अन्य कृषि सेवाओं को एक-दूसरे से जोड़ा जा सकेगा। हालांकि, समीक्षा बैठक में सामने आया कि अधिकांश राज्यों ने अभी तक खाद बिक्री और सरकारी खरीद व्यवस्था को किसान पहचान पत्र से नहीं जोड़ा है। फिलहाल मध्य प्रदेश और गोवा में पूरे राज्य में किसान पहचान पत्र के माध्यम से खाद बिक्री की व्यवस्था लागू है। वहीं झारखंड, तेलंगाना, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में यह व्यवस्था अभी शुरू नहीं हो सकी है।

वास्तविक खेती करने वाले किसानों की पहचान पर जोर

हरियाणा के कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि खाद पर सरकार बड़ी राशि का अनुदान देती है। इसलिए इसका लाभ वास्तविक किसानों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने जमीन के मालिकों के बजाय वास्तव में खेती करने वाले किसानों को किसान पहचान पत्र देने की व्यवस्था मजबूत करने पर जोर दिया।

फसल उत्पादन के वास्तविक समय के आंकड़े मिलेंगे

डिजिटल कृषि मिशन के तहत डिजिटल फसल सर्वे भी चलाया जा रहा है। इसका उद्देश्य फसल उत्पादन से जुड़े वास्तविक समय के आंकड़े तैयार करना है, ताकि सरकार आयात-निर्यात और कृषि नीतियों से जुड़े फैसले समय पर ले सके। कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, अभी अंतिम फसल उत्पादन आंकड़े तैयार होने में एक साल से अधिक समय लग जाता है। डिजिटल सर्वे के माध्यम से यह जानकारी काफी जल्दी उपलब्ध हो सकेगी। हालांकि अभी केवल आठ राज्यों ने डिजिटल सर्वे के आंकड़ों का इस्तेमाल शुरू किया है।

राज्यों ने गिनाईं लागू करने की चुनौतियां

बैठक में राज्यों ने मिशन को लागू करने में आ रही कई समस्याओं की जानकारी दी। अधिकारियों के अनुसार, शहरों के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याएं हैं। इसके अलावा नामों में गड़बड़ी, दोहराव हटाने की प्रक्रिया और आपदा राहत सहित दूसरी सरकारी जिम्मेदारियों में कर्मचारियों की व्यस्तता के कारण भी काम प्रभावित हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार पश्चिम बंगाल और झारखंड समेत आठ राज्यों ने इसी महीने किसान पहचान पत्र बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।

बटाईदार और किरायेदार किसानों की पहचान बनी चुनौती

समीक्षा में यह भी सामने आया कि 22 राज्यों ने अभी तक बटाईदार, किरायेदार और अन्य वास्तविक खेती करने वाले किसानों को किसान पहचान पत्र देने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई है। शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसान पहचान पत्र बनाने के लिए राज्यों को आर्थिक सहायता भी दी जा रही है। इसके बावजूद कई राज्यों में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई है।

पूर्वोत्तर राज्यों में जमीन रिकॉर्ड बड़ी समस्या

पूर्वोत्तर राज्यों के मंत्रियों और अधिकारियों ने बताया कि वहां भूमि रिकॉर्ड, कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, अधिक बारिश और पारंपरिक भूमि स्वामित्व व्यवस्था के कारण डिजिटल कृषि व्यवस्था लागू करना चुनौतीपूर्ण है। अरुणाचल प्रदेश के कृषि मंत्री गैब्रियल डी. वांगसू ने बताया कि राज्य में पारंपरिक भूमि रिकॉर्ड और भू-मानचित्र उपलब्ध नहीं होने के कारण किसानों तथा जमीन के स्वामित्व की पहचान करना मुश्किल है। उन्होंने राज्य की स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार लचीली व्यवस्था अपनाने की मांग की।

कृषि जनगणना के बाद बढ़ सकता है लक्ष्य

कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, मौजूदा लक्ष्य वर्ष 2015-16 की कृषि जनगणना के आधार पर तय किए गए हैं। वर्ष 2021-22 की कृषि जनगणना के आंकड़े जारी होने के बाद देश में कृषि जोतों की संख्या करीब दो करोड़ बढ़ने की संभावना है। ऐसे में किसान पहचान पत्र का दायरा भी बढ़ सकता है।

25 अगस्त को प्रधानमंत्री के सामने रखी जा सकती है रिपोर्ट

सूत्रों के अनुसार डिजिटल कृषि मिशन और दालों में आत्मनिर्भरता मिशन की समीक्षा से जुड़े प्रमुख निष्कर्ष 25 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने रखे जा सकते हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में डिजिटल कृषि मिशन की रफ्तार बढ़ाने और राज्यों की जिम्मेदारी तय करने को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जाने की संभावना है।

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