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भीषण गर्मी में झींगा पालकों पर संकट, उत्पादन बचाने के उपाय जरूरी

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नई दिल्ली: देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान 40 से 45 डिग्री के पार पहुंचने से झींगा पालन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। तेज गर्मी के कारण तालाब का पानी अत्यधिक गर्म हो रहा है, जिससे पानी में घुली ऑक्सीजन का स्तर तेजी से घटता है। विशेषज्ञों के अनुसार झींगा के लिए 30 से 32 डिग्री से कम तापमान उपयुक्त माना जाता है, जबकि 25 से 26 डिग्री तापमान सबसे अनुकूल होता है। ऐसे में मौजूदा तापमान झींगा के जीवन और उत्पादन दोनों के लिए खतरा बन गया है।

गर्म पानी से घट रही ऑक्सीजन, बढ़ा खतरा

तेज गर्मी के कारण तालाब का पानी गर्म होते ही उसमें मौजूद ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है। झींगा के लिए यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है, क्योंकि उसे जीवित रहने और बढ़ने के लिए पर्याप्त ऑक्सीजन की जरूरत होती है। गर्म हवाओं और बढ़ते तापमान के चलते पानी में मौजूद प्राकृतिक हरित परत भी कमजोर पड़ जाती है, जिससे झींगा को मिलने वाली ऑक्सीजन और कम हो जाती है।

खुराक और तालाब प्रबंधन में बदलाव जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार गर्मी के मौसम में झींगा पालन में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। दोपहर के समय खुराक कम कर देनी चाहिए और कुल आहार का केवल सीमित हिस्सा ही दिया जाना चाहिए। सुबह, शाम और रात के समय संतुलित मात्रा में भोजन देना अधिक लाभकारी होता है। तालाब के पानी को ठंडा रखने के लिए दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक वायु संचार उपकरण लगातार चलाने की सलाह दी गई है। साथ ही तालाब में पानी की गहराई बढ़ाकर 5 से 5.5 फुट तक करने से नीचे का पानी अपेक्षाकृत ठंडा बना रहता है, जिससे झींगा को राहत मिलती है।

पोषण और ऊर्जा की पूर्ति पर जोर

झींगा को गर्मी से बचाने के लिए मीठे पानी में गुड़ और विटामिन सी मिलाकर देने की सलाह दी जाती है। इससे उनकी ऊर्जा बनी रहती है और गर्मी का असर कम होता है। इसके अलावा आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति करना भी बेहद जरूरी है, ताकि झींगा की वृद्धि प्रभावित न हो।

तेज गर्मी बनी सबसे बड़ा खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि देश में प्रचलित झींगा प्रजातियां सामान्यतः 26 से 31 डिग्री तापमान के लिए अनुकूल होती हैं, लेकिन वर्तमान में कई जगह तापमान 42 से 43 डिग्री तक पहुंच रहा है, जो उनके लिए घातक साबित हो सकता है। बढ़ती गर्मी के साथ यदि उचित प्रबंधन नहीं किया गया तो झींगा उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। ऐसे में झींगा पालकों के लिए यह समय बेहद सावधानी और वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने का है, ताकि नुकसान को कम किया जा सके और उत्पादन को सुरक्षित रखा जा सके।

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