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राजस्थान में 1,717 करोड़ के सिंचाई प्रोजेक्ट्स को मिली मंजूरी

rajsthan cenal

जयपुर: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को श्रीगंगानगर जिले के साधुवाली में गंग नहर की सौवीं सालगिरह के अवसर पर राज्य के किसानों के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएँ कीं। उन्होंने इस ऐतिहासिक नहर को महाराजा गंगा सिंह की दूरदर्शिता की मिसाल बताते हुए कहा कि सतलुज से मिलने वाली यह नहर रेगिस्तान को उपजाऊ भूमि में बदलने वाली जीवनरेखा साबित हुई है। इसी मौके पर उन्होंने 1,717 करोड़ रुपये की नई सिंचाई परियोजनाओं को मंजूरी दी।

गन्ने के MSP में 15 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और गन्ना उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य सरकार ने सभी किस्मों के MSP में वृद्धि की है। नई दरें इस प्रकार हैं:

सरकार के अनुसार, इस बढ़ोतरी से गन्ना उत्पादक किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनकी आय में बढ़ोतरी होगी।

सिंचाई इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर बड़ा निवेश

कार्यक्रम के दौरान CM शर्मा ने राज्य में सिंचाई सुविधाओं को आधुनिक बनाने की दिशा में चल रहे कार्यों की जानकारी दी। प्रमुख परियोजनाएँ इस प्रकार हैं:

सभी प्रोजेक्ट्स को अक्टूबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, नहरों और माइनर्स की मरम्मत पर अतिरिक्त 75 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

किसानों को मिला 44,000 करोड़ से ज्यादा का बिना ब्याज फसल लोन

मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार ने पिछले दो सालों में कैनाल सिस्टम को मजबूत करने पर लगभग 5,000 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। IGNP कैनाल के मॉडर्नाइजेशन के लिए अकेले 3,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

उन्होंने यह भी जानकारी दी:

इसके अलावा, राम जल सेतु लिंक और यमुना जल समझौते के लिए DPR तैयार करने का काम जारी है।

PM-KUSUM स्कीम में राजस्थान अग्रणी

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान PM-KUSUM सोलर स्कीम में देश के टॉप परफॉर्मिंग राज्यों में शामिल है।
जिले में चल रहे विकास प्रोजेक्ट्स जैसे नहर मरम्मत, पक्की माइनरों का निर्माण और IGNP को मजबूत करने की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

“मौत की घाटी को जिंदगी की घाटी बनाया”: केंद्रीय मंत्री मेघवाल

कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने भी गंग नहर के ऐतिहासिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इस नहर ने एक सदी पहले जिस क्षेत्र को “मौत की घाटी” कहा जाता था, उसे “जिंदगी की घाटी” में बदल दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसान, जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हुए।

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