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प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को हरियाणा में ऐसे मिलेगी रफ्तार

Prime Minister in Haryana

चंडीगढ़: किसानों की आय बढ़ाने और कृषि योजनाओं को बेहतर तरीके से जमीन पर उतारने के उद्देश्य से हरियाणा में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को गति देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य स्तरीय समिति का गठन किया है। इस समिति की अध्यक्षता राज्य के मुख्य सचिव करेंगे, जबकि कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के प्रशासनिक सचिव को सदस्य सचिव नियुक्त किया गया है। इस संबंध में विभाग की ओर से आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है।

सरकारी बयान के अनुसार, हरियाणा सरकार का फोकस इस योजना को चयनित जिलों में परियोजना मोड में लागू करने पर रहेगा, ताकि कृषि से जुड़ी विभिन्न योजनाओं का समन्वित और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। इससे संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और किसानों को योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा।

समिति में शामिल होंगे कई अहम विभागों के वरिष्ठ अधिकारी

अधिसूचना के मुताबिक, इस राज्य स्तरीय समिति में मत्स्य पालन, सिंचाई, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी, उद्योग, विकास एवं पंचायत और ग्रामीण विकास विभागों के प्रशासनिक सचिवों को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा राज्य के कृषि, बागवानी, पशु चिकित्सा और मत्स्य विश्वविद्यालयों के कुलपति भी समिति का हिस्सा होंगे।

वित्तीय संस्थानों के बेहतर समन्वय के लिए नाबार्ड के राज्य प्रतिनिधि और राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) के संयोजक को भी समिति में सदस्य बनाया गया है। समिति के अध्यक्ष को यह अधिकार भी दिया गया है कि आवश्यकता पड़ने पर अन्य प्रासंगिक अधिकारियों या विशेषज्ञों को समिति में शामिल किया जा सके।

वित्तीय संसाधन और विभागीय समन्वय पर रहेगा जोर

राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि समिति की प्रमुख जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना होगी कि योजना के तहत सभी संबंधित कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त और समय पर वित्तीय संसाधन उपलब्ध हों। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना भी समिति की अहम भूमिका होगी, ताकि योजनाएं कागजों से निकलकर वास्तविक रूप से खेतों तक पहुंच सकें।

मार्केटिंग, ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन पर विशेष फोकस

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत जिला स्तर पर तैयार की जाने वाली योजनाओं में बीज, खाद, सिंचाई जैसे बुनियादी कृषि इनपुट्स के साथ-साथ मार्केटिंग, ब्रांडिंग और वैल्यू एडिशन को भी प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि सिर्फ उत्पादन बढ़ाने से किसानों की आय नहीं बढ़ेगी, बल्कि उनके उत्पादों को बेहतर बाजार, सही कीमत और पहचान दिलाना भी जरूरी है।

इसी उद्देश्य से संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे चयनित जिलों के कृषि उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच, प्रसंस्करण और ब्रांडिंग में विशेष सहयोग प्रदान करें।

किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने की तैयारी

समिति योजना के क्रियान्वयन की नियमित समीक्षा करेगी। इसमें फील्ड लेवल पर खाली पदों को समय पर भरना, धनराशि की निर्बाध और समयबद्ध रिलीज तथा सभी एजेंसियों के बीच समन्वय सुनिश्चित करना शामिल होगा। इसके अलावा यह भी अनिवार्य किया गया है कि हर विभाग अपनी वार्षिक योजना को वित्त वर्ष की शुरुआत से पहले प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की वार्षिक कार्ययोजना के साथ समेकित करे।

राज्य सरकार का कहना है कि इस मजबूत संस्थागत ढांचे से योजना का लाभ सीधे किसानों तक पहुंचेगा, कृषि उत्पादों की आय, गुणवत्ता और बाजार क्षमता में सुधार होगा और हरियाणा में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी।

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