नई दिल्ली: पोल्ट्री विशेषज्ञों का कहना है कि मुर्गियों में सबसे अधिक बीमारियां पेट से जुड़ी होती हैं और इनका सीधा असर उत्पादन पर पड़ता है। यदि मुर्गियां अंडा देने वाली हैं तो पेट की बीमारी के कारण अंडों की संख्या कम हो जाती है, जबकि मांस के लिए पाले जा रहे मुर्गों की बढ़त रुक जाती है और उनका वजन भी अपेक्षित रूप से नहीं बढ़ पाता। विशेषज्ञों के अनुसार पेट से जुड़ी इन समस्याओं के कई कारण होते हैं, लेकिन पीने का पानी इसमें सबसे अहम भूमिका निभाता है। इसी कारण पोल्ट्री फार्म में मुर्गे-मुर्गियों के लिए साफ और सुरक्षित पानी उपलब्ध कराना बेहद जरूरी माना जाता है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि पोल्ट्री फार्म स्थापित करने से पहले जिस जमीन पर फार्म बनाया जाना है, वहां के भूजल की जांच कराना जरूरी होता है। यदि पानी की गुणवत्ता सही नहीं है तो फार्म में मुर्गियां बार-बार बीमार पड़ सकती हैं। पोल्ट्री विशेषज्ञ साफ और सुरक्षित पानी पर विशेष जोर देते हैं, क्योंकि यदि मुर्गियां दूषित पानी पीती हैं तो उन्हें दिया जाने वाला अच्छा चारा भी अपेक्षित लाभ नहीं देता। उल्टा, खराब पानी के कारण बीमारियां बढ़ने से फार्म की लागत बढ़ जाती है और अंडे तथा मांस जैसे उत्पादों को बाजार में बेचने में भी कठिनाइयां आ सकती हैं।
बरसात में बढ़ जाता है दूषित पानी का खतरा
पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार बरसात के मौसम और बाढ़ की स्थिति में पानी के दूषित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है। इसके अलावा यदि फार्म में मुर्गियों के पीने का पानी लंबे समय तक टंकी में जमा रखा जाता है तो उसमें गंदगी जमा होने लगती है। इससे हानिकारक जीवाणुओं की संख्या बढ़ सकती है, जिससे मुर्गियों में बीमारी फैलने की आशंका रहती है। पानी की गुणवत्ता और उसका स्वाद पानी में मौजूद खनिज तत्वों और मौसम के प्रभाव पर भी निर्भर करता है।
स्वस्थ पानी के लिए जरूरी मानक
पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार मुर्गियों के लिए पीने के पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कुछ मानकों का पालन जरूरी होता है। कुल कठोरता 60 से 180 के बीच होनी चाहिए, अम्लता का स्तर 6.8 से 7.5 के बीच रहना चाहिए। नाइट्रेट की मात्रा 10 मिलीग्राम प्रति लीटर से अधिक नहीं होनी चाहिए, जबकि नाइट्राइट की मात्रा 0.4 मिलीग्राम प्रति लीटर तक ही स्वीकार्य मानी जाती है। इसके अलावा कुल जीवाणु गणना और कोलीफॉर्म गणना शून्य होनी चाहिए। कैल्शियम क्लोराइड की मात्रा लगभग 60 मिलीग्राम प्रति लीटर, सोडियम 50 मिलीग्राम प्रति लीटर और सल्फेट लगभग 125 मिलीग्राम प्रति लीटर के आसपास होना उचित माना जाता है।
पानी को सुरक्षित बनाने के उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि पानी में घुले अतिरिक्त खनिजों को सस्ते और सरल तरीकों से हटाना व्यावहारिक नहीं होता। यदि पानी में खनिजों की मात्रा बहुत अधिक हो तो दूसरे स्रोत से पानी लेना बेहतर माना जाता है। वहीं पानी में मौजूद जीवाणुओं से छुटकारा पाने के लिए क्लोरीनीकरण सबसे प्रभावी और सस्ता उपाय माना जाता है।
पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार मुर्गियों के पीने के पानी में क्लोरीन की मात्रा एक से दो भाग प्रति दस लाख के बीच होनी चाहिए। इस स्तर को बनाए रखने के लिए 1000 लीटर पानी में लगभग पांच से आठ ग्राम ब्लीचिंग पाउडर मिलाया जा सकता है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ब्लीचिंग पाउडर में क्लोरीन की मात्रा लगभग 35 प्रतिशत हो। पानी में यह मिश्रण करने के बाद कम से कम एक घंटे तक उसे टंकी में रोककर रखना चाहिए और उसके बाद ही मुर्गियों को पिलाना चाहिए।
जहां पानी को लंबे समय तक संग्रहित करना संभव नहीं है, वहां क्लोरीन डाइऑक्साइड या सोडियम हाइपोक्लोराइट का सीमित मात्रा में उपयोग किया जा सकता है। इसके अलावा आयोडीन युक्त घोल को भी जल शुद्ध करने के लिए उपयोगी माना जाता है। कुछ विशेष अमोनियम यौगिक वाले उत्पाद भी पानी को साफ रखने में सहायक हो सकते हैं, लेकिन उनका उपयोग विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों को स्वच्छ और सुरक्षित पानी दिया जाए तो कई तरह की बीमारियों से बचाव संभव है और उत्पादन भी बेहतर बना रहता है।
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