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PMFBY के तहत तीन साल में प्याज किसानों को ₹701 करोड़ का भुगतान

PMFBY onion farmers

नई दिल्ली: कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने राज्यसभा में जानकारी दी है कि भारत सरकार ने 2022-23 से 2024-25 के बीच तीन वर्षों में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत प्याज उगाने वाले किसानों को 701.54 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम भुगतान किया है। यह सहायता प्राकृतिक आपदाओं और प्रतिकूल मौसम के कारण हुए नुकसान की भरपाई के लिए दी गई है। कृषि और किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लिखित जवाब में बताया कि इस अवधि के दौरान प्याज की फसल के बीमा के लिए 27.21 लाख किसानों ने आवेदन किया। आवेदन और क्लेम भुगतान के मामले में महाराष्ट्र का हिस्सा सबसे अधिक रहा, इसके बाद कर्नाटक और आंध्र प्रदेश का स्थान रहा।

बुआई से कटाई तक पूरा जोखिम कवर

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के तहत बुआई से पहले की अवधि से लेकर कटाई के बाद तक फसल को सब्सिडी वाले प्रीमियम पर व्यापक बीमा सुरक्षा दी जाती है। राज्य सरकारों द्वारा अधिसूचित किए जाने पर प्याज जैसी फसलें भी योजना के दायरे में आती हैं। PMFBY योजना का उद्देश्य मौसम से होने वाले नुकसान और बाजार के उतार-चढ़ाव से प्रभावित फसलों में किसानों की आय को स्थिर करना है। प्याज जैसी नकदी फसलें विशेष रूप से मौसम और कीमतों की अस्थिरता के प्रति संवेदनशील मानी जाती हैं, ऐसे में बीमा कवरेज किसानों के लिए सुरक्षा कवच का काम करता है।

प्याज किसानों के लिए व्यापक नीति पैकेज

मंत्रालय ने बताया कि यह जानकारी प्याज किसानों की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े व्यापक नीति उपायों के हिस्से के रूप में साझा की गई है। सरकार बाजार हस्तक्षेप, बफर स्टॉक निर्माण और कटाई के बाद भंडारण व इंफ्रास्ट्रक्चर समर्थन जैसे कदम भी उठा रही है, ताकि किसानों को बेहतर मूल्य मिल सके और अचानक कीमत गिरने की स्थिति से राहत मिले।

एक्सपोर्ट कमाई में 20 प्रतिशत गिरावट

इस बीच भारत के प्याज निर्यात से होने वाली कमाई में गिरावट दर्ज की गई है। अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच देश ने 2,137 करोड़ रुपये का प्याज निर्यात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 2,663 करोड़ रुपये की तुलना में करीब 20 प्रतिशत कम है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि निर्यात नीति में बार-बार बदलाव, जैसे निर्यात प्रतिबंध, न्यूनतम निर्यात मूल्य और अन्य सरकारी कदमों ने वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को प्रभावित किया है। इसके चलते कुछ खरीदार देशों ने चीन और पाकिस्तान जैसे विकल्पों की ओर रुख किया है।

महाराष्ट्र और नासिक पर सीधा असर

भारत के कुल प्याज निर्यात में महाराष्ट्र की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा है। निर्यात मांग में कमी का सीधा असर राज्य के प्रमुख उत्पादन क्षेत्र नासिक जिले पर पड़ा है। घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ने से मंडियों में कीमतों पर दबाव बना है। रिपोर्टों के अनुसार कई मंडियों में प्याज के दाम उत्पादन लागत से भी नीचे चले गए हैं, जिससे किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। ऐसे हालात में बीमा क्लेम भुगतान किसानों को आंशिक राहत देने में अहम भूमिका निभा सकता है।

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