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अल नीनो की आशंका से कमजोर पड़ सकता है भारत का मॉनसून

El Niño

नई दिल्ली: भारत में मॉनसून की स्थिति को लेकर मौसम वैज्ञानिकों के बीच चिंता बढ़ती जा रही है। मौसम विशेषज्ञ देवेंद्र त्रिपाठी ने अल नीनो की संभावनाओं और इसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा है कि इस वर्ष यह वैश्विक मौसम प्रणाली भारत के मॉनसून को प्रभावित कर सकती है। अल नीनो एक महत्वपूर्ण जलवायु तंत्र है, जिसका सीधा असर खेती-बाड़ी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ता है।

अल नीनो क्या है और क्यों बढ़ी चिंता

वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर के सतही जल के तापमान में वृद्धि अल नीनो की स्थिति को जन्म देती है। वर्तमान में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से ऊपर जा रहा है। जून, जुलाई और अगस्त के दौरान अल नीनो की संभावना 40 से 60 प्रतिशत तक रहने का अनुमान है। यदि यह स्थिति बनती है तो भारत में मॉनसून कमजोर पड़ सकता है।

अल नीनो के दौरान सामान्यतः वर्षा में कमी देखी जाती है, जिससे सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। खासकर खरीफ फसलों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ने की आशंका है। धान, मक्का, सोयाबीन और दालों की पैदावार प्रभावित हो सकती है, जिससे ग्रामीण आय और रोजगार पर असर पड़ेगा।

इंडियन ओशन डायपोल की भूमिका

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इंडियन ओशन डायपोल पॉजिटिव स्थिति में रहता है तो वह मॉनसून को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। हालांकि वर्तमान परिस्थितियों में समुद्री तापमान में बढ़ोतरी ने वैज्ञानिकों और किसानों दोनों की चिंता बढ़ा दी है। यदि अल नीनो सक्रिय होता है तो देश के कई हिस्सों में वर्षा की कमी दर्ज की जा सकती है।

तापमान में बढ़ोतरी और क्षेत्रीय प्रभाव

भारत में तापमान लगातार बढ़ रहा है। 18 फरवरी को उत्तरी और मध्य भारत में हल्की बारिश के कारण तापमान में अस्थायी गिरावट दर्ज की गई, लेकिन 19 फरवरी से फिर से तापमान बढ़ने की संभावना जताई गई है। दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में तापमान सामान्य से ऊपर रिकॉर्ड किया गया है।

वर्षा की वर्तमान स्थिति चिंताजनक

एक जनवरी से 19 फरवरी तक देश में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से कम रहा है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अपेक्षाकृत बेहतर वर्षा हुई है, लेकिन मध्य और पूर्वी भारत में भारी कमी दर्ज की गई। झारखंड, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्यों में लगभग 100 प्रतिशत तक वर्षा की कमी बताई गई है, जो आने वाले कृषि सीजन के लिए गंभीर संकेत है।

आने वाले दिनों का पूर्वानुमान

22 से 25 फरवरी के बीच दक्षिण और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश की संभावना है। उत्तर भारत में मौसम मुख्यतः शुष्क बना रहेगा। मार्च की शुरुआत में एक नया पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा ला सकता है, जिससे तापमान में कुछ राहत मिल सकती है।

किसानों के लिए सलाह

मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुसार अपनी कृषि योजनाएं तैयार करने की सलाह दी है। अल नीनो की स्थिति पर लगातार नजर रखने और फसल चयन, सिंचाई प्रबंधन तथा बीज चयन में सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है। बढ़ते तापमान और संभावित कमजोर मॉनसून को देखते हुए सरकार और किसानों के बीच समन्वय अत्यंत आवश्यक बताया गया है, ताकि समय रहते रणनीति बनाकर कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को कम किया जा सके।

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