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प्याज के उत्पादन में वृद्धि, लेकिन कीमतों में गिरावट से किसान चिंतित

onion production and farmer

नई दिल्ली: देश में बागवानी फसलों के ताजा पूर्वानुमान ने प्याज किसानों की चिंता बढ़ा दी है। इस बार प्याज के उत्पादन में करीब 27 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। यह रिकॉर्ड ऐसे समय सामने आया है जब मंडियों में प्याज बेहद कम दाम पर बिक रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक उत्पादन और कमजोर निर्यात व्यवस्था के कारण किसानों और व्यापारियों दोनों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बढ़ता उत्पादन और गिरते दाम

मौजूदा समय में खरीफ प्याज का बड़ा भंडार मंडियों और किसानों के पास मौजूद है। रबी फसल की नई आवक से पहले इस स्टॉक को निकालना जरूरी हो गया है, जिसके कारण किसान कम कीमत पर प्याज बेचने को मजबूर हैं। उत्पादन लागत लगभग 20 रुपये प्रति किलो होने के बावजूद किसानों को केवल 5 से 10 रुपये प्रति किलो का भाव मिल रहा है, जिससे उन्हें भारी नुकसान हो रहा है।

निर्यात में बाधा से बिगड़ी स्थिति

निर्यात नीति में खामियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते विदेशी बाजारों में प्याज की मांग घट गई है। खाड़ी देशों में आपूर्ति प्रभावित होने से व्यापारियों को भी नुकसान हो रहा है। पहले जहां प्रीमियम गुणवत्ता का प्याज विदेशों में भेजा जाता था, अब वहां निर्यात लगभग ठप हो गया है।

आने वाले समय में और गिर सकते हैं भाव

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में बाजार में प्याज की आवक और बढ़ेगी, जिससे कीमतों में और गिरावट आ सकती है। एक साथ अधिक आपूर्ति होने से बाजार पर दबाव बढ़ेगा और किसानों को उचित मूल्य मिलने की संभावना कम हो जाएगी।

किसान हितैषी नीति की जरूरत

किसान संगठनों का कहना है कि सरकार को इस स्थिति को अवसर के रूप में देखना चाहिए। अधिक उत्पादन के बावजूद यदि उचित निर्यात नीति बनाई जाए, तो किसानों को बेहतर दाम मिल सकते हैं। इसके अलावा बफर भंडार की स्थिति मजबूत होने से देश में आपूर्ति संकट की आशंका भी कम हो जाएगी।

कुछ उम्मीदें अभी बाकी

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कुछ परिस्थितियां किसानों के लिए राहत ला सकती हैं। मौसम में बदलाव, पड़ोसी देशों में कम उत्पादन और वैश्विक बाजार की स्थिति भारत के लिए अवसर पैदा कर सकती है। यदि अंतरराष्ट्रीय हालात सुधरते हैं, तो निर्यात के रास्ते फिर से खुल सकते हैं और किसानों को बेहतर कीमत मिलने की संभावना बन सकती है। फिलहाल स्थिति चुनौतीपूर्ण बनी हुई है और किसानों को आने वाले समय में बाजार की परिस्थितियों पर नजर बनाए रखनी होगी।

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