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प्याज किसानों की बढ़ी चिंता, लागत से काफी नीचे बिक रही फसल

onion farmers

नई दिल्ली: देशभर में प्याज किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। एगमार्कनेट पोर्टल पर उपलब्ध प्राइस ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार जनवरी महीने में पिछले महीने के मुकाबले प्याज की कीमतों में हल्का सुधार जरूर देखने को मिला है, लेकिन सालाना आधार पर यानी जनवरी 2025 की तुलना में दाम अब भी काफी नीचे बने हुए हैं। इसका सीधा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि मौजूदा मंडी भाव उनकी उत्पादन लागत तक नहीं पहुंच पा रहे हैं। प्याज किसानों का कहना है कि एक क्विंटल प्याज उगाने में अब औसतन 2200 से 2500 रुपये की लागत आती है, जबकि अधिकांश मंडियों में भाव 1000 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास ही सिमटे हुए हैं। यही वजह है कि प्याज उत्पादक किसानों को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा है।

मध्य प्रदेश की मंडियों में प्याज के ताजा भाव

एगमार्कनेट के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश की कई मंडियों में प्याज के भाव बेहद कमजोर रहे। कुछ स्थानों पर न्यूनतम कीमत 100 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज की गई। हालांकि, मॉडल रेट के लिहाज से भोपाल, इंदौर, मंदसौर, नीमच और शाजापुर जैसी बड़ी मंडियों में औसत भाव 1000 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहा।

भोपाल मंडी में प्याज (FAQ) का औसत भाव करीब 1100 रुपये रहा, जबकि इंदौर मंडी में विभिन्न ग्रेड के प्याज 700 रुपये से 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक बिके। मंदसौर, रतलाम, नीमच और सैलाना जैसी मंडियों में अधिकतम भाव जरूर 1700–1800 रुपये तक पहुंचे, लेकिन यह मात्रा सीमित रही और अधिकांश किसानों को लागत से कम दाम ही मिले।

महाराष्ट्र की मंडियों में भी किसानों की परेशानी

महाराष्ट्र, जो देश का सबसे बड़ा प्याज उत्पादक राज्य है, वहां भी हालात कुछ अलग नहीं हैं। लासलगांव, पिंपलगांव, नासिक, देवला और येवला जैसी प्रमुख मंडियों में न्यूनतम भाव 300 से 600 रुपये प्रति क्विंटल तक दर्ज किए गए। औसत भाव अधिकतर मंडियों में 1200 से 1500 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास रहा।

हालांकि, चंद्रपुर, कामठी और इस्लामपुर जैसी कुछ मंडियों में अधिकतम भाव 2200 से 2500 रुपये तक पहुंचे, लेकिन यह दाम केवल सीमित आवक और बेहतर गुणवत्ता वाले प्याज को ही मिल पाए। बड़ी संख्या में किसानों को इन भावों का लाभ नहीं मिल सका।

सालाना आधार पर लगभग सभी राज्यों में गिरे दाम

एगमार्कनेट के सालाना आंकड़े बताते हैं कि देश के लगभग सभी प्रमुख राज्यों में प्याज के भाव जनवरी 2025 के मुकाबले गिरावट पर हैं। मध्य प्रदेश में औसत भाव करीब 25.6 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 35.5 प्रतिशत, कर्नाटक में 44.8 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में 35.7 प्रतिशत तक नीचे हैं।

बिहार, गुजरात, हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में भी 20 से 40 प्रतिशत तक की सालाना गिरावट दर्ज की गई है। इससे साफ है कि यह समस्या केवल एक-दो राज्यों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश के प्याज किसानों को प्रभावित कर रही है।

लागत और भाव के बीच बढ़ता अंतर

किसानों के मुताबिक बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई, मजदूरी और भंडारण लागत लगातार बढ़ रही है। इसके बावजूद मंडियों में प्याज के दाम लागत से काफी नीचे बने हुए हैं। कई किसानों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो आने वाले सीजन में प्याज की खेती से किसान दूरी बनाने को मजबूर हो सकते हैं।

FAQ और Non-FAQ प्याज का फर्क

मंडी में प्याज की कीमत तय करने में ग्रेडिंग की अहम भूमिका होती है। FAQ यानी Fair Average Quality वह प्याज होता है जो सरकारी मानकों पर खरा उतरता है। इसका आकार और रंग लगभग समान होता है, सड़न और नमी तय सीमा से कम होती है और यह भंडारण व परिवहन के लिए बेहतर माना जाता है।

वहीं Non-FAQ ग्रेड प्याज वह होता है, जो इन मानकों को पूरा नहीं करता। इसका आकार असमान हो सकता है, कुछ मात्रा में सड़ा या नरम प्याज शामिल हो सकता है और इसकी स्टोरेज लाइफ भी कम होती है। यही वजह है कि Non-FAQ प्याज के दाम FAQ ग्रेड के मुकाबले काफी कम मिलते हैं।

कुल मिलाकर, मौजूदा हालात में प्याज किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। जब तक मंडी भाव उत्पादन लागत के करीब नहीं पहुंचते या सरकारी स्तर पर कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं होता, तब तक किसानों को राहत मिलना मुश्किल नजर आ रहा है।

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