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लहसुन के थोक भाव में हल्की रिकवरी, किसानों को राहत अभी दूर

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नई दिल्ली: देशभर में कई महीनों से गिरते हुए लहसुन के थोक भाव में अब हल्की रिकवरी देखने को मिल रही है। हालांकि, यह कीमतें अभी भी पिछले साल के मुकाबले काफी कम हैं। प्रमुख लहसुन उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात और उत्तर प्रदेश में किसानों को मिलने वाले दाम अभी भी अपेक्षाकृत कमजोर हैं। एगमार्केट पोर्टल पर उपलब्ध प्राइस ट्रेंड रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी 2026 में मध्य प्रदेश में लहसुन का औसत थोक भाव करीब 6,450 रुपये प्रति क्विंटल, गुजरात में लगभग 7,400 रुपये और उत्तर प्रदेश में लगभग 6,900 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है।

राजस्थान में औसत भाव 8,500 रुपये प्रति क्विंटल रिकॉर्ड किया गया है। इन चारों राज्यों का संयुक्त औसत करीब 7,300 रुपये प्रति क्विंटल है, जो ऑल इंडिया एवरेज 9,000 रुपये प्रति क्विंटल से काफी कम है। इस ऑल इंडिया एवरेज में उन राज्यों का योगदान अधिक है, जहां उत्पादन कम और आवक कम रहती है, जिससे भाव ऊंचे रहते हैं, जबकि मुख्य उत्पादक इलाकों में किसानों को अभी भी कमजोर दाम मिल रहे हैं।

पिछले साल के मुकाबले कीमतें 55-70 प्रतिशत कम

आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से लहसुन के दाम गिरने लगे थे। नवंबर और दिसंबर में कुछ राज्यों में कीमतों में बढ़ोतरी देखी गई, और जनवरी 2026 में माह-दर-माह आधार पर हल्की तेजी आई है। फिर भी, पिछले साल के मुकाबले लहसुन के दाम 55-70 प्रतिशत तक कम हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नवंबर से शुरू हुई हल्की तेजी कितने समय तक जारी रहेगी, यह अभी साफ नहीं है।

रबी सीजन की नई फसल का असर

सामान्य ट्रेंड के अनुसार, रबी सीजन की लहसुन फसल फरवरी अंत से मंडियों में आने लगेगी और मार्च-अप्रैल में पीक पर पहुंच सकती है। नई आवक बढ़ने से फिलहाल बनी हल्की तेजी फिर गिर सकती है। आगामी कीमतों की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि कितना उत्पादन होगा और मंडियों में कितनी मात्रा में फसल उपलब्ध होगी।

जनवरी 2026 में राज्यों के लहसुन के औसत थोक भाव

ऑल इंडिया औसत: 9,028.20 रुपये प्रति क्विंटल

कुल मिलाकर, जनवरी में लहसुन के दामों में हल्की सुधार की शुरुआत दिख रही है, लेकिन मुख्य उत्पादक राज्यों में किसानों को मिलने वाले दाम अभी भी संतोषजनक स्तर से काफी नीचे हैं। आगामी रबी फसल और नई आवक ही भावों को सही दिशा देने में निर्णायक भूमिका निभाएगी।

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