नई दिल्ली: रबी सीजन में चना की नई फसल की आवक तेज होते ही बाजार में दबाव साफ दिखाई देने लगा है। कमजोर मांग और सरकारी खरीद की शुरुआत न होने के कारण चना के दाम लगातार नरम पड़ते जा रहे हैं। कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में चना फिलहाल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे कारोबार कर रहा है। व्यापारियों के अनुसार, इस साल रकबा बढ़ने और मौसम अनुकूल रहने से उत्पादन बेहतर रहने की संभावना है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ रहा है।
15 दिन में 10-15 प्रतिशत तक गिरावट
एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंडिया पल्सेस एंड ग्रेन्स एसोसिएशन (IPGA) के सचिव सतिश उपाध्याय ने बताया कि बीते 15 दिनों में चना के दाम करीब 10 से 15 प्रतिशत तक गिर चुके हैं। मंडियों में चना की नई आवक लगातार बढ़ रही है, जबकि दाल मिलों की खरीद सुस्त बनी हुई है। फिलहाल मंडियों में चना 54-55 रुपये प्रति किलो के आसपास बिक रहा है। आने वाले दिनों में महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और राजस्थान से बड़ी मात्रा में फसल आने की संभावना है, जिससे कीमतों पर और दबाव बन सकता है।
आयातित चना बना देसी फसल की चुनौती
चना दाल की मांग कमजोर रहने की एक बड़ी वजह सस्ता और बेहतर क्वालिटी का आयातित चना बताया जा रहा है। बंदरगाहों पर उपलब्ध आयातित चना देसी चना की तुलना में न सिर्फ सस्ता है, बल्कि दाल रिकवरी और रंग-आकार भी बेहतर माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, व्यापार सूत्रों का कहना है कि तंजानिया और ऑस्ट्रेलिया से आया चना 5,300 से 5,425 रुपये प्रति क्विंटल के दायरे में उपलब्ध है। इसी कारण मिलर्स मंडियों से देसी चना की खरीद करने में हिचक रहे हैं।
सरकारी खरीद से ही मिल सकता है सहारा
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी की शुरुआत से चना के औसत थोक दामों में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। सरकार ने 2026-27 रबी मार्केटिंग सीजन के लिए चना का MSP 5,875 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। हालांकि कर्नाटक में MSP पर सीमित मात्रा में खरीद को मंजूरी दी गई है, लेकिन बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक बड़े स्तर पर सरकारी खरीद शुरू नहीं होती, तब तक दामों में ठोस सुधार की उम्मीद कम है।
ज्यादा रकबे से उत्पादन बढ़ने के संकेत
इस साल चना की बुवाई का रकबा पिछले साल की तुलना में करीब 5 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा है। मौसम अनुकूल रहने से फसल की स्थिति भी अच्छी बताई जा रही है। यही वजह है कि बाजार में यह धारणा मजबूत है कि इस बार चना का कुल उत्पादन पिछले साल से अधिक रह सकता है। फिलहाल बाजार में आवक भारी, मांग कमजोर और आयात मजबूत बना हुआ है, जिससे आने वाले समय में भी चना के दाम दबाव में रहने की आशंका जताई जा रही है।
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