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भारत में सरसों उत्पादन बढ़ा, रबी 2024-25 में रिकॉर्ड रकबा

Mustard production in India

नई दिल्ली: भारत में सरसों उत्पादन लगातार बढ़ोतरी के रुझान पर बना हुआ है। देश की प्रमुख तिलहन फसल के रूप में सरसों ने 2023-24 में रिकॉर्ड 130 लाख टन उत्पादन के साथ अपनी मजबूत स्थिति दर्ज कराई है। इसके बाद कनाडा, पाकिस्तान और अन्य देश सरसों उत्पादन में आगे हैं। भारत में यह फसल मुख्य रूप से ठंडे मौसम में 74 प्रतिशत सिंचित क्षेत्र के साथ उगाई जाती है और राजस्थान, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।

रबी 2024-25 में उत्पादन और रकबा बढ़ा

सॉलवेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन (SEA) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 के रबी सीजन में भारत में रेपसीड-सरसों का कुल उत्पादन 115.16 लाख टन तक पहुंच गया है। इसके साथ ही सरसों का कुल बोया गया क्षेत्र बढ़कर 92.15 लाख हेक्टेयर हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अधिक पैदावार देने वाली किस्मों के उपयोग और बेहतर एग्रो-टेक्नोलॉजी के कारण उत्पादन में यह बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।

राज्यवार सरसों उत्पादन की स्थिति

खेती की परिस्थितियां और किस्में

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, सरसों को ठंडा और स्थिर मौसम तथा पर्याप्त नमी वाली मिट्टी की जरूरत होती है। बीज आमतौर पर 8 से 10 दिनों में अंकुरित हो जाते हैं। पीली सरसों की किस्में 80-85 दिनों में पक जाती हैं, जबकि भूरी और अन्य किस्मों को 90-95 दिन लगते हैं।

बढ़ी औसत पैदावार

भारत में सरसों की औसत पैदावार 2023-24 में बढ़कर लगभग 1443 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। यह दर्शाता है कि आधुनिक तकनीक, बेहतर बीज और संतुलित पोषण प्रबंधन का सकारात्मक असर उत्पादन पर पड़ रहा है।

किसानों के सामने चुनौतियां

हालांकि उत्पादन बढ़ा है, लेकिन किसानों के सामने लागत में बढ़ोतरी, श्रम शुल्क में इजाफा और कीट-रोगों का प्रकोप जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर फसल सुरक्षा और लागत घटाने के उपाय किए जाएं, तो आने वाले वर्षों में सरसों उत्पादन और अधिक बढ़ सकता है।

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