नई दिल्ली। किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने और बाजार में गिरते भाव से बचाने के लिए NABARD और NCDEX ने मिलकर एक अहम पहल की है। इस पहल के तहत शुरू की गई मूल्य सुरक्षा योजना खास तौर पर हल्दी, जीरा और धनिया जैसी मसाला फसलों की खेती करने वाले किसानों के लिए बनाई गई है। योजना का उद्देश्य किसानों को न्यूनतम मूल्य (फ्लोर प्राइस) की सुरक्षा देना और उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाना है। सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यह योजना आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और कर्नाटक में लागू की गई है। इन राज्यों में मसाला उत्पादक किसानों को सीधे तौर पर इसका लाभ मिल रहा है।
कैसे काम करती है मूल्य सुरक्षा योजना
इस योजना के तहत किसान उत्पादक संगठन (FPOs) ऑप्शन्स ट्रेडिंग में हिस्सा लेते हैं। यह व्यवस्था एक तरह के बीमा की तरह काम करती है। यदि बाजार में कीमतें गिरती हैं तो किसानों को नुकसान नहीं होता। NABARD की ओर से पुट ऑप्शन प्रीमियम का एक हिस्सा सब्सिडी के रूप में दिया जाता है, जिससे किसानों को कम लागत में अपनी फसल की कीमत सुरक्षित करने का मौका मिलता है।
पहले चरण में मिला बड़ा फायदा
योजना के पहले चरण में 80 FPOs और करीब 1.34 लाख किसानों को जोड़ा गया। इस दौरान 6,544 टन फसल को मूल्य सुरक्षा के दायरे में लाया गया। महाराष्ट्र के वाशिम जिले की Rashtronnati Farmer Producer Company ने पहले नौ महीनों में ही करीब 1 करोड़ रुपये का कारोबार किया। जनवरी से मार्च 2025 के बीच FPOs को कुल 6.31 करोड़ रुपये का फायदा हुआ।
हल्दी की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल
योजना के लागू होने के बाद हल्दी की कीमतों में बीते पांच वर्षों का सबसे बड़ा उछाल देखा गया है। वर्तमान में हल्दी का भाव करीब 14,355 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि एक साल पहले यह 10,689 रुपये प्रति क्विंटल था। NCDEX पर अप्रैल कॉन्ट्रैक्ट 15,090 रुपये प्रति क्विंटल पर चल रहा है। कम उत्पादन, निर्यात मांग और दवा उद्योग की जरूरतों के चलते कीमतें मजबूत बनी हुई हैं।
किसान और FPO कैसे कमा रहे मुनाफा
Rashtronnati FPO ने 30 टन हल्दी को मूल्य सुरक्षा के तहत कवर किया, जबकि 150 टन हल्दी खुले बाजार में बेचकर अच्छा लाभ कमाया। इस FPO में 900 सदस्य हैं, जिनमें 180 महिलाएं शामिल हैं। ये किसान करीब 500 एकड़ क्षेत्र में हल्दी की खेती करते हैं।
बाजार की समझ बढ़ी
NCDEX के अनुसार, इस योजना के चलते किसान अब फ्यूचर्स और स्पॉट मार्केट के भावों को समझने लगे हैं। जब कीमतें अच्छी होती हैं तो FPOs खुले बाजार में बिक्री करते हैं और जब गिरावट की आशंका होती है तो ऑप्शन ट्रेडिंग के जरिए नुकसान से बच जाते हैं। अब तक 150 से अधिक जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं।
किसानों के लिए क्यों अहम है योजना
मूल्य सुरक्षा योजना से किसानों को न्यूनतम मूल्य की गारंटी मिल रही है, जिससे वे अपनी फसल बेचने और मार्केटिंग से जुड़े फैसले आत्मविश्वास के साथ ले पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि NABARD और NCDEX की यह पहल किसानों को बाजार में ज्यादा मजबूत बनाएगी और भविष्य में कृषि व्यापार को अधिक सुरक्षित दिशा देगी।
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