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बिहार में मशरूम की खेती को कृषि का दर्जा, अब मिलेगी सस्ती बिजली

Mushroom Farming in Bihar

पटना: बिहार में मशरूम खेती करने वाले किसानों के लिए एक अच्छी खबर है। दरअसल, बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने मशरूम की खेती करने वाले किसानों को बड़ी राहत देते हुए इसे कृषि श्रेणी में शामिल करने का फैसला लिया है। इस निर्णय के बाद अब मशरूम उत्पादक किसानों को सस्ती दरों पर बिजली उपलब्ध होगी, जिससे उनकी खेती की लागत में कमी आएगी। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में मशरूम की खेती तेजी से बढ़ी है और हजारों किसान इससे जुड़े हुए हैं।

कृषि दर पर मिलेगी बिजली, लागत होगी कम

आयोग ने मशरूम खेती को कृषि श्रेणी में शामिल करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इसके तहत किसानों को अब कृषि दरों पर बिजली मिलेगी, हालांकि मशरूम प्रसंस्करण और निर्माण इकाइयों को इस दायरे में शामिल नहीं किया गया है। इस फैसले से छोटे और सीमांत किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा।

55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली

राज्य सरकार के निर्णय के अनुसार अब मशरूम किसानों को मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध होगी। पहले उन्हें व्यावसायिक दर पर बिजली लेनी पड़ती थी, जिससे लागत अधिक होती थी। सरकार पहले से ही मशरूम उत्पादन पर 90 प्रतिशत तक अनुदान भी दे रही है, जिससे इस क्षेत्र को और बढ़ावा मिलेगा।

1 अप्रैल से लागू होंगी नई दरें

बिहार में मशरूम उत्पादन इकाइयों को अब तक व्यावसायिक दर पर बिजली मिलती थी, लेकिन आयोग के नए आदेश के बाद 1 अप्रैल 2026 से कृषि नियमों के अनुसार बिजली दरें लागू होंगी। इससे किसानों के बिजली बिल में काफी कमी आएगी। राज्य में मुख्य रूप से ऑयस्टर, बटन, पैडी स्ट्रॉ और मिल्की मशरूम की खेती की जाती है।

2.22 करोड़ उपभोक्ताओं को भी राहत

राज्य में लगभग 2.22 करोड़ बिजली उपभोक्ता हैं, जिनमें बड़ी संख्या किसानों की है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्ष 2026-27 के लिए बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी, जिससे सभी उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

टैरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव खारिज

बिजली वितरण कंपनियों द्वारा टैरिफ बढ़ाने के प्रस्ताव को आयोग ने खारिज कर दिया है। आयोग ने सभी श्रेणियों में दरों को स्थिर रखते हुए उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ नहीं डालने का फैसला लिया है। वर्तमान में मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत करोड़ों उपभोक्ताओं को मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है, जिससे शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में आर्थिक बचत हो रही है।

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