नई दिल्ली: भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने डेयरी फार्म से जुड़े सभी संचालकों के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन नियमों के तहत अब दूध उत्पादन और उससे जुड़े उत्पाद बनाने वाले छोटे और बड़े सभी डेयरी फार्मों को अनिवार्य रूप से पंजीकरण या लाइसेंस लेना होगा। इस कदम का उद्देश्य दूध की गुणवत्ता बनाए रखना और पशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर करना है।
आय के आधार पर पंजीकरण और लाइसेंस की व्यवस्था
FSSAI की ओर से जारी आदेश के अनुसार जिन डेयरी फार्मों की वार्षिक आय 12 लाख रुपये से कम है, उन्हें पंजीकरण कराना होगा, जबकि इससे अधिक आय वाले संचालकों को लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा। विभाग समय-समय पर निरीक्षण भी करेगा, ताकि नियमों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित किया जा सके।
साफ-सफाई पर विशेष जोर
डेयरी फार्म में स्वच्छता बनाए रखना इन नियमों का अहम हिस्सा है। पशुपालन विभाग द्वारा भी लगातार पशुपालकों को जागरूक किया जा रहा है कि साफ-सफाई रखने से पशुओं में बीमारियों का खतरा कम होता है और दूध की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है।
दैनिक सफाई के लिए जरूरी दिशा-निर्देश
डेयरी फार्म में रोजाना सफाई के लिए पानी के पाइप का उपयोग कर गोबर और अन्य कचरे को बहाकर हटाने की सलाह दी गई है। ठोस कचरे को फावड़े से इकट्ठा कर गाड़ी के माध्यम से बाहर ले जाना चाहिए। बड़े पशुशालाओं में इसके लिए ट्रॉली या अन्य साधनों का उपयोग किया जा सकता है। नालियों का निर्माण भी विशेष तरीके से करने को कहा गया है। नाली का आकार यू के समान होना चाहिए, जिसकी गहराई 6 से 8 सेंटीमीटर और चौड़ाई 30 से 40 सेंटीमीटर रखी जानी चाहिए। नालियों में उचित ढलान होना जरूरी है ताकि तरल कचरा आसानी से बाहर निकल सके।
कचरा प्रबंधन और खाद का उपयोग
पशुशाला से निकलने वाले तरल कचरे को नालियों के माध्यम से एकत्रित कर भंडारण टैंक तक पहुंचाने की व्यवस्था करनी चाहिए। इस तरल खाद का उपयोग खेतों में सिंचाई या अन्य कार्यों में किया जा सकता है। ठोस कचरे को अलग से इकट्ठा कर खाद के गड्ढों में सुरक्षित रखना चाहिए, जिससे वह सही तरीके से सड़कर उपयोगी खाद बन सके और मक्खियों के प्रकोप से भी बचाव हो सके। इन नियमों के लागू होने से डेयरी क्षेत्र में स्वच्छता, गुणवत्ता और उत्पादन प्रणाली में सुधार होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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