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कम वर्षा पर केंद्र सतर्क, 210 जिलों के लिए विशेष तैयारी

Monsoon Deficit

नई दिल्ली: देशभर में खरीफ फसलों की बुवाई के बीच कम वर्षा और अल नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को कम वर्षा की आशंका वाले 262 संवेदनशील जिलों की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में बताया गया कि इनमें से 210 जिलों में अब भी सामान्य से कम वर्षा हुई है, जबकि 8 जिलों में अब तक न के बराबर या बिल्कुल वर्षा दर्ज की गई है। कृषि मंत्री ने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों में किसानों तक कृषि ऋण और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ अधिक से अधिक पहुंचाने के निर्देश दिए।

262 संवेदनशील जिलों में वर्षा की स्थिति की समीक्षा

नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में आयोजित समीक्षा बैठक में खरीफ बुवाई, मानसून की प्रगति, अल नीनो के संभावित प्रभाव, उर्वरकों की उपलब्धता तथा खाद्यान्न भंडारण की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बताया कि देशभर में 262 ऐसे जिलों की पहचान की गई है, जहां वर्षा की कमी की आशंका बनी हुई है। इनमें से 52 जिलों में हाल के दिनों में वर्षा होने से स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन 210 जिलों में अब भी पर्याप्त वर्षा नहीं हुई है। इनमें 8 जिले ऐसे हैं, जहां अब तक लगभग बिल्कुल वर्षा नहीं हुई है।

कृषि ऋण और फसल बीमा का दायरा बढ़ाने के निर्देश

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया वर्षा प्रभावित जिलों में किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए कृषि ऋण की उपलब्धता बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक किसानों को किसान ऋण सुविधा से जोड़ा जाए ताकि खेती के लिए आवश्यक संसाधनों की कमी न हो। इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने और अधिक किसानों तथा अधिक फसलों को बीमा के दायरे में लाने के लिए भी विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।

प्रत्येक जिले में लागू होगा आपातकालीन कार्ययोजना

कम वर्षा और संभावित मानसूनी चुनौतियों से निपटने के लिए प्रत्येक जिले के लिए तैयार आपातकालीन कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया। कृषि मंत्री ने कहा कि जिन राज्यों में वर्षा की स्थिति अधिक चिंताजनक है, वहां के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर तैयारियों और उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को अल नीनो की स्थिति और वर्षा के रुझानों पर लगातार नजर बनाए रखने के निर्देश भी दिए।

प्रमुख जलाशयों में पिछले वर्ष से कम जल भंडारण

बैठक में देश के 166 प्रमुख जलाशयों में जल भंडारण की स्थिति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इन जलाशयों में पिछले वर्ष की तुलना में इस समय पानी का स्तर कम है। हालांकि अधिकांश क्षेत्रों में भूजल की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है। सूखे की संभावित स्थिति पर नजर रखने के लिए फसल मौसम निगरानी समूह नियमित साप्ताहिक बैठकें कर रहा है। अब तक 15 राज्यों ने इसके लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति भी कर दी है।

कृषि विज्ञान केंद्रों को सतर्क रहने के निर्देश

बैठक में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद तथा केंद्रीय शुष्क भूमि कृषि अनुसंधान संस्थान की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। राज्यों के साथ जिला स्तर पर आवश्यक बैठकों का आयोजन किया जा चुका है। कृषि विज्ञान केंद्रों को निर्देश दिए गए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर किसानों को तत्काल तकनीकी सहायता और अन्य जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

खरीफ बुवाई, दलहन और तिलहन मिशनों की हुई समीक्षा

कृषि मंत्री ने खरीफ फसलों की बुवाई की प्रगति के साथ-साथ दलहन, तिलहन और कपास से जुड़े मिशनों की भी समीक्षा की। उन्होंने इन क्षेत्रों में चल रहे प्रयासों को और तेज करने पर बल दिया। इसके अलावा बागवानी फसलों की बुवाई, कृषि उपज मंडियों में औसत साप्ताहिक कीमतों तथा दलहन, तिलहन, गेहूं और चावल के बफर भंडार की स्थिति का भी आकलन किया गया।

आवश्यकता से अधिक उपलब्ध हैं उर्वरक और बीज

अधिकारियों ने बताया कि अप्रैल से जून 2026 के दौरान देश में 176.13 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों की आवश्यकता थी, जबकि इस अवधि में 286.37 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध रहे। राष्ट्रीय बीज निगम के पास भी पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हैं। कृषि मंत्री ने उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता पर संतोष व्यक्त करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिया कि विशेष रूप से जनजातीय और दूरदराज के क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाए।

प्रभावित जिलों की लगातार होगी निगरानी

केंद्र सरकार का कहना है कि कम वर्षा और अल नीनो से उत्पन्न होने वाली संभावित चुनौतियों के बीच खरीफ फसलों और किसानों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए संवेदनशील जिलों की स्थिति की लगातार समीक्षा की जाएगी, आपातकालीन कार्ययोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा तथा आवश्यकता के अनुसार समय पर अतिरिक्त कदम भी उठाए जाएंगे।

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