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आम की बागवानी: जनवरी में लापरवाही पड़ सकती है भारी

mango plantation

पूसा (बिहार): आम की बागवानी करने वाले किसानों के लिए दिसंबर और जनवरी का महीना सबसे निर्णायक माना जाता है। इसी अवधि में आम के पेड़ के अंदर यह तय होता है कि उसमें नई पत्तियां निकलेंगी या मंजर आएगा। विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय की गई छोटी सी गलती भी पूरे सीजन की फसल पर भारी पड़ सकती है। राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के प्लांट पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. एस.के. सिंह का कहना है कि जनवरी में आम के बाग की अनदेखी करना फसल के लिए घातक साबित हो सकता है, क्योंकि इसी समय पेड़ यह निर्णय लेता है कि वह फल देगा या केवल पत्तियों की बढ़वार करेगा।

नाइट्रोजन और ज्यादा सिंचाई बन सकती है नुकसान की वजह

उत्तर भारत की जलवायु में किसान अक्सर दिसंबर-जनवरी में नाइट्रोजन युक्त खाद या अधिक सिंचाई कर देते हैं। इससे पेड़ में फूल आने की जगह नई पत्तियां निकलने लगती हैं और मंजर प्रभावित हो जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय पेड़ की वानस्पतिक वृद्धि को रोकना जरूरी होता है, ताकि ऊर्जा पुष्पन और फलन में लगे।

कोहरा और नमी बढ़ा रहे रोगों का खतरा

जनवरी में कोहरा और नमी अधिक रहने के कारण आम के बागों में पाउडरी मिल्ड्यू, एन्थ्रेक्नोज जैसी फफूंद बीमारियां और भुनगा कीट तेजी से हमला करते हैं। ये रोग मंजर को काला कर सुखा देते हैं, जिससे सीधा असर पैदावार पर पड़ता है। इसके अलावा बोरॉन और जिंक जैसे सूक्ष्म तत्वों की कमी से फूल कमजोर होकर समय से पहले झड़ जाते हैं।

आम के बागों के लिए जरूरी ‘स्पेशल स्प्रे’

डॉ. एस.के. सिंह के अनुसार दिसंबर-जनवरी में पोटैशियम नाइट्रेट 1 प्रतिशत का छिड़काव करने से मंजर आने की प्रक्रिया तेज होती है। वहीं पैक्लोब्यूट्राजोल का उपयोग पेड़ की फालतू बढ़वार को रोककर उसे पुष्पन की ओर मोड़ता है। आम की बागवानी के दौरान इसे जनवरी के पहले पखवाड़े तक मिट्टी में डालना सबसे प्रभावी माना गया है। फूलों को मजबूत बनाने के लिए बोरॉन 0.2 प्रतिशत और जिंक सल्फेट का छिड़काव जरूरी है। इससे परागण बेहतर होता है और फल की गुणवत्ता व चमक बढ़ती है।

मंजर को कीट और बीमारियों से ऐसे बचाएं

मंजर निकलने से ठीक पहले पाउडरी मिल्ड्यू, एन्थ्रेक्नोज और भुनगा कीट का खतरा सबसे अधिक रहता है। जैसे ही मंजर निकलने लगे, हेक्साकोनाजोल या डाइफेनोकोनाजोल जैसे फफूंदनाशक के साथ इमिडाक्लोप्रिड का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि एक बार पाउडरी मिल्ड्यू लग जाने के बाद उसे नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है, इसलिए समय रहते बचाव ही सबसे बेहतर उपाय है।

बंपर पैदावार की तैयारी पहले से जरूरी

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार आम की अच्छी पैदावार की नींव फल तुड़ाई के बाद ही पड़ जाती है। अक्टूबर-नवंबर में कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का छिड़काव करने से टहनियों और तनों में छिपे रोगाणु खत्म हो जाते हैं। साथ ही बाग की सफाई और हल्की छंटाई से पेड़ स्वस्थ रहता है और नए मंजर सुरक्षित निकलते हैं।

मौसम को देखकर करें छिड़काव

जलवायु परिवर्तन के दौर में पाला और घना कोहरा किसी भी समय पड़ सकता है। ऐसे में स्प्रे हमेशा साफ मौसम में, सुबह 10 बजे के बाद या दोपहर 3 बजे के बाद करना चाहिए। अत्यधिक ठंड या पाले की चेतावनी होने पर छिड़काव कुछ दिन के लिए टाल देना ही बेहतर होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर और सही प्रबंधन से न केवल आम की संख्या बढ़ती है, बल्कि उसकी गुणवत्ता भी बाजार में बेहतर दाम दिलाने लायक बनती है।

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